पखवारे भर तक मौसम साफ रहने के बाद सोमवार की सुबह एक बार फिर करवट ले लिया। सुबह से शुरू हुई रिमझिम फुहारों ने दोपहर तक बारिश का रूप धारण कर लिया। अचानक हुई बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ। मड़ाई के लिए काटी गई फसल के बोझ में पानी पड़ने से सड़ने की आशंका सताने लगी है। खलिहानों में रखी गई फसल को भी बारिश नुकसानदायक होगा।
मार्च का महीना किसानों के लिए मुश्किल लेकर आया है। महीने भर के अंदर सोमवार सुबह तीसरी बार बारिश होने से किसान परेशान हो गए। मार्च के पहले सप्ताह में बारिश संग चक्रवाती तूफान से गिर चुकी फसलों को लेकर परेशान किसान कुछ दिन शांत रहे लेकिन पखवारा पहुंचते-पहुंचते एक बार फिर बारिश ने दस्तक दी।
गेहूं, सरसो, अरहर, चना, मटर समेत अन्य तिलहनी फसलों के नुकसान का किसान अभी आकलन भी नहीं कर पाए थे कि सोमवार की सुबह एक बार फिर बारिश शुरू हो गई। बेमौसम बारिश से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। खेतों में खड़ी और गिरी गेहूं की फसल काटने की जुगत में लगे किसानों को बारिश ने तगड़ा झटका दिया है, जो फसलें खेतों में काटकर छोड़ी गई हैं उनके लिए बारिश नुकसानदायक हो गई है।
खलिहान में रखी गई फसलों के लिए भी बारिश हानि पहुंचाएगी। हालांकि सोमवार शाम में आसमान साफ हुआ लेकिन ठंडी हवाए चलने से किसानों की परेशानी कम नहीं हुई है। परऊपुर के प्रगतिशील किसान रामेश्वर सिंह ने कहा कि पहले ही मौसम की बेरूखी से काफी नुकसान हो चुका है। बारिश अगर रूक-रूककर होती रही तो भारी नुकसान होगा।
उप निदेशक कृषि डा. आरके मौर्य ने बताया कि बेमौसम बारिश से काटकर छोड़ी गई फसल के लिए नुकसानदायक है। जो फसलें खेत में खड़ी हैं उसके लिए बारिश नुकसानदायक नहीं है। मौसम साफ होने पर वह सूख जाएगी।