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स्वरोजगार से दूर होगी बेरोजगारी

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घोसिया। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण में बेरोजगारी और आर्थिक कमजोरी स्वरोजगार से दूर की जा सकती है। बेरोजगार युवा, लघु-सीमांत किसानों के लिए मधुमक्खी पालन सरल और बचत का स्वरोजगार है। उक्त बातें मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में पांच दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक विश्वेंदु द्विवेदी ने कहीं।
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इस दौरान फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डा. मनोज पांडेय ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शुद्ध शहद, मोम, पराग, प्रोफैलिस, सहफसलों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। कहा कि वर्तमान परिवेश में शहद की मांग अधिक होने से पालक प्रति बाक्स 15 से 20 किलोग्राम शहद का उत्पादन आसानी के साथ कर सकते हैं। बाजार में शहद की कीमत प्रति किलोग्राम दो से ढाई सौ रुपये है। आयुर्वेद में शहद को अमृत का दर्जा मिलने से सेवन की ओर जनसामान्य का रुझान बढ़ रहा है। शहद ऊर्जावान होने के साथ गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है। प्रशिक्षण में किसानों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ प्रैक्टिकल भी दिखाया जाएगा। छत्ते में तीन तरह की मधुमक्खियां होती है एक रानी और कुछ नर होते हैं जिन्हें निखट्टू कहते हैं, कामेरी मधुमक्खियां ही फूलों से रस चूस कर पराग के रुप में एकत्रित करती हैं। शासन स्तर से इस पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में डा. एके चतुर्वेदी, डॉ. आरपी चौधरी, डा. गोविंद चौधरी, सर्वेश बरनवाल, फार्म प्रबंधक डा. प्रभाषचंद्र सिंह, धनंजय प्रसाद, प्रमोद पासवान, भरत, गुड्डू सिंह समेत प्रशिक्षु महिला-पुरुष मौजूद रहे।
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