ज्ञानपुर। जल निकासी की समस्या किसानों के लिए मुश्किल का सबब बन गई है। बारिश के पिछले सीजन में डूबे जंगीगंज इलाके के दो सौ बीघे से अधिक खेत अब तक सूख नहीं पाए हैं। पानी इतना लगा है कि इन खेतों में इस बार गेहूं और अन्य फसलों की बुवाई भी नहीं हो पाई। इससे सैकड़ों किसानों को करारा झटका लगा है। प्रशासन अब तक इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा पाया है।
डीघ विकास खंड डीघ के महुआरी, गोधना और कनलुआ गांवों के सिवान में सात माह से जमे बरसात के पानी की निकासी न होने से लगभग दौ सौ बीघे खेत अब तक जलमग्न हैं। ऊंज, कुरमैचा, सूफीनगर, मैलौना, दरवांसी, जंगीगंज बाजार, नथईपुर, रामकिशुनपुर-बसहीं आदि क्षेत्रों से होकर बहने वाले बरसात के पानी की निकासी के लिए बड़ा नाला था। तीन वर्ष पूर्व वाराणसी-प्रयागराज राजमार्ग को सिक्सलेन में बदलने के लिए एनएचएआई ने नाले को ध्वस्त कर अपने मनमाफिक बना दिया। लेकिन, उससे क्षेत्रीय बाहे को नहीं जोड़ा गया। इससे पिछले दो वर्ष से पांच सौ किसानों की खेतीबारी प्रभावित हो गई है। किसान एनएचएआई और तहसील अधिकारियों की उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा स्तर पर होने वाले मनरेगा के कार्यों पर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की मनमानी प्रधानों के कार्यकाल समाप्ति तक चली और करोड़ों का वारा-न्यारा कर लिया गया, लेकिन जलनिकासी रास्ते की मांग कागज तक ही सीमित रह गई। सिंचाई कालोनी जंगीगंज से लेकर दौरियाहीं तक होने वाली सीजनल खेती से किसान वंचित हो गए हैं। डीघ बीडीओ सुरेंद्र मौर्य ने कहा कि मामले की जांच कराकर किसानों के हित में कदम उठाए जाएंगे।