सीतामढ़ी। कोइरौना थानाक्षेत्र के इटहरा गांव के शुक्रवार को गंगेश्वरधाम मंदिर के समीप शव दफनाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हो गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण होने लगा। दूसरे समुदाय के लोगों ने कहा कि धर्मस्थल के समीप नहीं बल्कि कब्रिस्तान के लिए छोड़ी गई जमीन पर शव दफनाया जाए, लेकिन वे मानने को तैयार न थे। उनकी दलील थी कि कुछ दिनों पहले वहां दो-तीन लाशें दफनाई गईं थीं। खबर लगते ही वहां पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी पहुंच गए। तीन घंटे से अधिक चली पंचायत के बाद दोनों पक्षों की सहमति पर शव को कब्रिस्तान के लिए निर्धारित जमीन पर दफनाया गया।
इटहरा गांव के पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर स्थित बाबा गंगेश्वरनाथ धाम प्राचीन महादेव मंदिर है। शुक्रवार सुबह एक समुदाय के लोग प्राचीन मंदिर के पीछे स्थित जमीन में शव दफनाने के लिए पहुंचे। उसी दौरान खबर लगते ही दूसरे समुदाय के लोग पहुंच गए। उनका आरोप था कि गांव की आराजी नंबर 1708 के छह बिस्वा 10 धूर रकबा विधिवत कब्रिस्तान के नाम दर्ज है। इसलिए कब्रिस्तान की भूमि में शव को दफनाया जाना चाहिए। मामला दो वर्गों का होने के कारण प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। तहसीलदार और थानाध्यक्ष कोइरौना अपने मातहतों को लेकर इटहरा में पहुंच गए। एक समुदाय इस बात पर लगातार दबाव बनाने की फिराक में था कि शव का दफ़न मंदिर के पीछे ही हो, लेकिन ग्राम प्रधान इटहरा अजीत सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण इस बात पर अड़ गए कि जब कब्रिस्तान के लिए सरकारी जमीन सुरक्षित है तो धार्मिक स्थल के पास शव का दफ़न कतई उचित नहीं है। इसलिए शव को कब्रिस्तान में ही दफ़न किया जाए। तहसीलदार जगबीर सिंह, नायब तहसीलदार कोनिया, क़ानूनगो, क्षेत्रीय लेखपाल मौके पर पहुंचकर दोनों समुदाय के लोगों को बुलाया। करीब तीन घंटे तक चली पंचायत के बाद समस्या का हल निकला। तहसीलदार जगबीर सिंह ने बताया कि एक समुदाय के लोग कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए राजी हो गए। समझौता कराने वालों में प्रशासनिक अफसरों के अलावा गांव के कमलाशंकर मिश्रा, ग्राम प्रधान अजीत सिंह, थाना ध्यक्ष कोइरौना अजय सिंह, चौकी इंचार्ज कटरा अजय मिश्रा आदि रहे।