गोपीगंज के चर्चित गो मांस प्रकरण का शनिवार को खुलासा हो गया। गत 26 जनवरी 2016 को पकड़े गए मवेशियों के कंकाल (ओमैसम) को तत्कालीन एसओ और क्राइम ब्रांच के सिपाही ने साजिश कर गाजियाबाद में बेच दिया था। सौदा 18 लाख में तय हुआ था। इसमें से आठ लाख रुपये आरोपी एसओ ने ले लिया था। पुलिस ने कंकाल खरीदनेवाले दो लोगों सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से सात हजार किलो कंकाल बरामद हुआ है जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। मीडिया के सामने इस प्रकरण का खुलासा विंध्याचल मंडल के डीआईजी रतन कुमार ने किया। आरोपी पूर्व एसओ ने चार्जशीट होने तक कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया है, जबकि क्राइम ब्रांच का आरोपी सिपाही इमरान फरार चल रहा है।
गत 26 जनवरी को गोपीगंज के तत्कालीन एसओ रमेश चौबे ने एक ट्रक ओमैसम पकड़ा था। इसे गोमांस बताते हुए उन्होंने उसे गंगा के किनारे भवानीपुर गांव में जमीन में दबाने का दावा किया था। उधर, मांस को जांच के लिए मथुरा फोरेंसिक लैब भेजा गया। 13 फरवरी को लैब से मिली जांच रिपोर्ट में पता चला कि वह गोमांस नहीं है। 23 अप्रैल को दिल्ली गेट हापुड़ निवासी व्यापारी मो. इकबाल ने गोपीगंज थाने में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि पुलिस ने जो ट्रक पकड़ा है उसमें गोमांस नहीं नमक लगा पशु कंकाल है, जो छह माह तक खराब नहीं होता। उसने माल और वाहन संबंधी वैध कागजात दिखा कर माल छोड़ने की मांग की, लेकिन एसओ ने कुछ नहीं किया। इस पर इकबाल ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। दबाव बढ़ा तो पुलिस ने दोबारा जमीन में गाड़े गए मांस के स्थान पर जांच की तो पुराना सड़ा हुआ मांस निकला। इस बीच जांच में पता चला कि क्राइम ब्रांच के सिपाही इमरान खान ने थानाध्यक्ष के साथ मिलकर पकड़े गए पशु कंकाल का गाजियाबाद में 18 लाख रुपये में बेच दिया था। इसमें शाहीद खां निवासी न्यू पुलिस लाइन का क्यारोड रांची, फरमान अहमद निवासी रहमत कॉलोनी डोरंडा रांची, सादिक निवासी 11 हत्तीखाना डोरंडा रांची और मो. समीर निवासी काली स्थान रोड, मैनान मुहल्ला गुदरी चौक रांची भी शामिल थे। इस मामले में फरमान अहमद को पहले ही जेल भेजा जा चुका था। बाद में पुलिस ने ज्ञानपुर सीओ एसएस पांडेय की अगुवाई में एक टीम बनाई और फरमान को कोर्ट से पांच दिन की रिमांड पर लेकर गाजियाबाद गई और उसकी निशानदेही पर पशुकंकाल के साथ गाजियाबाद के मुरादनगर के व्यापारियान मोहल्ला निवासी मो. इमरान, मो. शाहजाद और मो. सिताब को गिरफ्तार किया। सीओ ने बताया कि पूर्व एसओ रमेश चौबे और क्राइम ब्रांच के सिपाही इमरान ने 18 लाख में माल का सौदा कर आठ लाख रुपये रमेश चौबे ने ले भी लिए थे। जबकि माल बिक जाने के बाद शेष रकम देने की बात तय थी।