62.87 करोड़ की स्टांप चोरी में पकड़ी गई लालानगर टोल प्लाजा की संचालन करने वाली काशी टोलवे प्राइवेट लिमिटेड पर जुर्माना भी लग सकता है। एआईजी स्टांप पंकज सिंह के अनुसार कंपनी पर स्टांप शुल्क का एक से चार फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है। खास बात है कि लालानगर टोल प्लाजा पर पकड़ी गई स्टांप चोरी एक नजीर बन सकती है, क्योंकि प्रदेश में चलने पर 90 फीसदी से अधिक टोल 100 रुपये के स्टांप पर ही संचालित होते हैं। एआईजी स्टांप के अनुसार टोलों के अनुबंधों की जांच हो तो करोड़ों रुपये सरकार को राजस्व के रूप में मिल सकते हैं।
वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर लालानगर टोल प्लाजा का संचालन करने वाली काशी टोलवे प्राइवेट लिमिटेड, नेताजी सुभाष प्लेस प्रीतमपुर, नई दिल्ली की कंपनी है। टोल ने 18 मार्च, 2023 को एनएचएआई को 3244 करोड़ रुपये भुगतान कर टोल को 15 साल के लिए लीज पर लिया था। प्रमुख सचिव स्टांप के निर्देशों के बाद टोल के अनुबंध की जांच हुई तो यह लीज अनुबंध यानि की पट्टा अनुबंध की श्रेणी में पाया गया। जिसके बाद रजिस्ट्री विभाग ने 62.87 करोड़ रुपये के स्टांप की चोरी पकड़ी और कलेक्टर स्टांप के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया। टोल कंपनी का मुकदमा फिलहाल जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चलेगा।
आने वाले दिनों में टोल कंपनी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट की अदालत से स्टांप शुल्क की चोरी के आरोपों में कंपनी पर जुर्माना भी लग सकता है। एआईजी स्टांप पंकज सिंह ने बताया कि कलेक्टर स्टांप के तहत मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद अब यह मामला जिला मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चलेगा। वहां से ही टोल कंपनी रजिस्ट्री शुल्क का एक से चार फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बताया कि प्रदेश में चलने वाले जितने भी टोल हैं। उसमें करीब 90 फीसदी से अधिक टोल कंपनियां 100 रुपये सामान्य अनुबंध वाले स्टांप पर ही टोल का संचालन कर रही है। ऐसे में अगर सभी टोलों के अनुबंध पत्रों की जांच हो तो हजारों करोड़ रुपये सरकार को राजस्व के रूप में प्राप्त हो।
विवादों में रहा है टोल, जनप्रतिनिधि भी खोल चुके हैं मोर्चा
लालानगर टोल प्लाजा अक्सर विवादों में रहा है। दो टोलों के बीच की दूरी केवल 35 किमी के अंदर होने को लेकर भी समय-समय पर स्थानीय लोगों द्वारा सवाल खड़ा किया जाता है। इसके अलावा टोल कर्मियों के दुर्व्यवहार को लेकर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं। लालानगर से टोल को हटाने को लेकर जिले के जनप्रतिनिधि भी मोर्चा खोल चुके हैं। इसको हटाने को लेकर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी से लेकर सीएम तक को पत्रक लिखा गया है।