जिला अस्पताल में तीन लाख की लागत से लगाई गई टाइल्स चार महीने में ही टूटने लगी है। इसके अलावा कोटा पत्थर भी अभी से टूटने लगे हैं। चार महीने में क्षतिग्रस्त होने वाली टाइल्स और पत्थर की गुणवत्ता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग कराए गए कार्य की फाइल खंगालनी शुरू कर दी है। अगर काम की गुणवत्ता बजट के अनुसार न मिली तो फर्म पर कार्रवाई भी होगी।
जिला अस्पताल में चार माह पहले तीन लाख की लागत से ओपीडी भवन के सामने टाइल्स और इमरजेंसी के सामने कोटा पत्थर लगाया गया था। अस्पताल की निधि से यह कार्य कराए गए थे। जिससे कि बारिश के दिनों में इमरजेंसी के सामने पानी न लगे। ओपीडी भवन के सामने लगाई गई करीब 40 मीटर टाइल्स चार महीने में ही चार जगहों से टूट गई है। टूटे हुए स्थान पर बालू बिखरा हुआ है।
वहीं दो स्थानों पर सीमेंट लगाकर उसे जोड़ने का प्रयास किया गया है। चार महीने के भीतर ही टूटी टाइल्स और कोटा पत्थर की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन भी इसको लेकर सख्त रूख अपनाने की राह पर है और कराए गए काम की फाइल खोलकर इसकी लागत के अनुसार काम की गुणवत्ता को परखा जाएगा। अगर मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो संबंधित फर्म पर कार्रवाई भी होगी।
-
दलील ऐसी, जो गले न उतरे
चार महीने में टूटी टाइल्स व कोटा पत्थर को लेकर जिम्मेदारों का कहना है कि टाइल्स बिछ़ाने के बाद ही चार पहिया वाहन इस पर चढ़ा दिया गया। जिससे टाइल्स टूट गया। इसके अलावा अस्पताल में चार पहिया वाहन, एंबुलेंस का आना निरंतर लगा रहता है। इससे भी टाइल्स कमजोर हुई है। अब बड़ा सवाल है कि अगर कोई काम होता है तो उसके पहले ही वहां की परिस्थितियों को देखा जाता है। उसी अनुसार बजट जारी होता है, लेकिन इस मामले में ऐसी दलील दी जा रही है, जो किसी के गले न उतर सके।