ज्ञानपुर। 47वें कालीन मेले में विदेशी खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए निर्यातक नए-नए डिजाइन पर जोर देर रहे हैं। उनका मानना है कि परंपरागत चीजों को आधुनिक रूप में पेश किया जाए तो खरीदों को आकर्षित किया जा सकता है।
कालीन मेले में ईरानी थीम पर बनी 'जंगल' कालीन खरीदारों की पसंद बनी है। इस कालीन की खासियत है कि पहली दफा देखने पर यह सामान्य कालीन लगेगी, लेकिन जैसे ही थोड़ा ध्यान देंगे इसमें जंगल की डिजाइन उभर कर आएगी। इसको भदोही के अनुभवी कारीगरों ने तैयार किया है।
भदोही की हस्तनिर्मित कालीनों की हमेशा से अलग पहचान रही हैं। समय के साथ हो रहे बदलावों को अपनाकर बॉयरों को अपने साथ जोड़ना हर एक निर्यातक की चाहत होती है। इसी प्रयास में निर्यातक परंरागत डिजाइन व कलर को आधुनिकता के साथ जोड़कर खरीदों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
कालीन मेले में ऐसी ही एक खास कालीन भदोही के निर्यातक संजय और ब्रजेश गुप्ता ने तैयार कराया है। ईरानी थीम की इस कालीन का नाम 'जंगल' है। हस्तनिर्मित कालीन का धागा भी हाथ से बनाया गया है। निर्यातक ब्रजेश गुप्ता बताते हैं कि एक स्क्वायर सेमी में 150 गांव वाले इस कालीन की बुनाई लो एंड हाई तरीके से की गई है।
जिससे इस पर उकेरी गई आकृतियां उभर सके। 8 बाई 10 फीट के इस कालीन की कीमत 1.5 लाख रुपये है। वहीं अंतिम खरीदार को यह 4.5 लाख में मिलेगी। तीन अनुभवी मजदूरों ने इसे पांच महीने में तैयार किया है। ईरानी थीम के इस कालीन में घोड़ा, हिरन, खरगोश जैसे ईरान के जंगलों में पाए जाने वाले जानवर उकेरे गए हैं। वहीं जंगल के ईरानी शिकारी और पेड़ भी उकेरे गए हैं। इसका कांसेप्ट जर्मन के एक डिजाइनर द्वारा तैयार कराया गया है।
रसियन और अफ्रीकी खरीदारों को आ रही पसंद
भदोही के निर्यातक ब्रजेश गुप्ता बताते हैं कि इस कालीन में परंपरागत चीजों के नए तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। खरीदारों की डिमांड के अनुसार बदलाव कर यूनिक कालीन बनाया गया है। इसकी सबसे अधिक डिमांड रसियन और अफ्रीकी खरीदारों में हैं। रसियन खरीदारों ने इसका ऑर्डर भी दिया है। ईरानी थीम वाली इस डिजाइन में वहां जंगलों की झलकियां देखने को मिलेंगी।