ज्ञानपुर। जिले में अल्ट्रासाउंडों के नाम पर खेल चल रहा है। स्थिति यह है कि एक डाॅक्टर के नाम पर तीन-तीन अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। इसमें भी गौर करने वाली बात है कि ग्वालियर व प्रयागराज में बैठे चिकित्सक के नाम पर भी जनपद में सेंटर संचालित हो रहे हैं। सात माह पूर्व तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने इसकी जांच के लिए टीम का गठन किया था।
जांच टीम के सदस्यों ने आब्जर्वेशन रिपोर्ट दिया था। जिसमें इन बातों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट देने के कुछ ही दिनों बाद जिलाधिकारी का स्थानांतरण हो गया। जिससे यह जांच रिपोर्ट फाइलों में दब गई।
जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रहती है। कहीं मानकों की अनदेखी को लेकर तो कहीं पंजीकरण को लेकर मिल रही शिकायतों को देखते हुए सात माह पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी गौरांग राठी ने अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच के लिए टीम का गठन किया था। तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा गठित इस टीम में कुल 13 सदस्य शामिल थे। जिसमें शासकीय अधिवक्ताओं के साथ एनजीओ के सदस्य भी थे।
जांच टीम ने अल्ट्रासाउंड सेंटरों की पड़ताल करने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी को इसकी रिपोर्ट सौंपी थी। बताया जा रहा है कि इस गोपनीय रिपोर्ट में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण समेत कई कमियां थीं। जांच समिति पीसीपीएनडीटी के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच में पता चला कि एक ही चिकित्सक के नाम पर तीन-तीन अल्ट्रासाउंड, दो-दो अल्ट्रासाउंड संचालित हो रहे थे। इसके अलावा कई ऐसे भी सेंटर भी संचालित थे, जो प्रयागराज और ग्वालियर में बैठे चिकित्सकों के नाम पर संचालित हो रहे थे।
बताया कि रिपोर्ट गोपनीय है। इसलिए किसी का नाम उजागर नहीं कर सकते। बताया कि जिलाधिकारी का स्थानांतरण होने के बाद यह रिपोर्ट फाइलों में दबकर रह गई है। सेंटरों का जांच करने का अधिकार एसडीएम और नोडल अधिकारी को होता है। जिले में 51 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत है। जिसमें पांच अल्ट्रासाउंड पर कमियां मिलने के बाद उन्हें सील कर दिया गया है।