जिले में तीन हजार बच्चों के अभिभावक जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए परेशान है। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कोई दो तो कोई चार महीने से तहसील और ब्लाॅक का चक्कर लगा रहा है। जन्म प्रमाण पत्र न होने से किसी के बच्चे का बीमा नहीं हो पा रहा है। किसी के बच्चे का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है तो किसी के बच्चे को स्कूल में दाखिला नहीं हो पा रहा है। तहसील और ब्लॉकों में तीन हजार से अधिक आवेदन चार महीने से लंबित हैं। इसमें 70 फीसदी बच्चों की उम्र पांच साल से कम है। जिले की 546 ग्राम पंचायत और सात नगर निकायों में 20 लाख आबादी है। बच्चों के आधार कार्ड बनवाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र जरूरी होता है। स्कूलों में प्रवेश लेकर अन्य कार्यों के लिए आधार कार्ड का होना जरूरी है। सबसे ज्यादा लापरवाही तहसील स्तर के कर्मचारियों की ओर से बरती जा रही है, ब्लॉक से प्रमाण पत्र के कागजात तहसील भेजने के बाद कई-कई महीनों तक न तो प्रमाण पत्र बन पाता है और न ही अभिभावकों को सही जानकारी दी जाती है। हमारी टीम ने मंगलवार को सुरियावां और औराई ब्लॉक में पड़ताल की तो कई लोग आवेदन के चार महीने बाद प्रमाणपत्र बनने का इंतजार करते मिले। ज्ञानपुर ब्लाॅक के जखांव निवासी जर्नादन बिंद ने बताया कि जन्मप्रमाण पत्र न बनने से बच्चे का बीमा नहीं कर पा रहे हैं।
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ये हैं नियम
शासन के नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में जन्मे बच्चों के जन्म प्रमाण के लिए ब्लॉक में आवेदन करना होता है, जबकि निकाय क्षेत्र में जन्मे बच्चों के प्रमाण पत्र के लिए संबंधित निकाय में आवेदन किया जाता है। ब्लॉक स्तर के आवेदन तहसील व निकाय के आवेदन सिटी मजिस्ट्रेट के यहां भेजे जाते हैं। यहां से सत्यापन के बाद यह प्रपत्र फिर से ब्लॉक आते हैं और संबंधित व्यक्ति को दे दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया में लगभग एक माह का समय लग जाता है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते कई माह से जिले में विभिन्न तहसीलों व ब्लॉकों में आवेदन लंबित पड़े हैं। आवेदन के एक महीने में जन्मप्रमाण पत्र बनाने का नियम है।
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क्या बोले अभिभावक
- ढाई महीने पहले बेटी के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। तहसील जाने पर ब्लॉक पर भेजा गया। वहां गया तो बताया गया कि अभी तक आया नहीं है। दो महीने से तहसील और ब्लॉक पर चक्कर लगा रहे। प्रमाणपत्र न बनने से 20 वर्षीय बेटी का बीए में दाखिला नहीं हो पा रहा है। - दिनेश यादव, चकभावानीदास
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- गांव के पांच अभिभावकों ने सुरियावां ब्लॉक पर जन्म प्रमाणपत्र के लिए तीन महीने पहले आवेदन किया था। कई बार जाने के बाद उनको प्रमाणपत्र नहीं मिला। पूछने पर पता चला कि सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई है। तहसील और ब्लॉक में यही समस्या होती है। - श्याम यादव, प्रधान प्रतिनिधि बलिभद्रपुर
स्कूलों में 3500 बच्चों की डीबीटी फंसी
तहसील और ब्लॉक में जन्म प्रमाणपत्र का आवेदन लंबित होने से बेसिक शिक्षा परिषद के साढ़े तीन हजार बच्चों को अब तक डीबीटी का लाभ नहीं मिल सका है। जन्म प्रमाणपत्र न मिलने से बच्चों का आधार नहीं बन सका। इससे विद्यालयों की तरफ से सबमिट नहीं हो सका है। जिससे यूनिफार्म, बैग आदि लेने के लिए शासन से मिलने वाला 1200-1200 रूपये की डीबीटी नहीं हो सकी है।
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तहसीलवार लंबित आवेदनों की स्थिति
तहसील लंबित आवेदन
भदोही 500
औराई 350
ज्ञानपुर 350
नोट- ज्ञानपुर, भदोही, सुरियावां, डीघ, औराई और अभोली ब्लॉक में 250 से 300 आवेदन लंबित हैं। छह ब्लॉकों को मिलाकर कुल करीब 1800 आवेदन लंबित है।
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वर्जन
जन्म प्रमाण पत्र को लेकर लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। अगर ब्लॉक स्तर पर सचिव या पंचायत सहायक की गड़बड़ी या हीलाहवाली मिलती है तो इसको लेकर संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। - बाल गोविंद शुक्ल, सीडीओ।
जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज - इनसेट लगा रहे
-अस्पताल का जन्म प्रमाण पत्र या डिस्चार्ज स्लिप।
- माता-पिता का आधार कार्ड या पहचान पत्र।
-माता-पिता का विवाह प्रमाण पत्र यदि उपलब्ध हो।
- देरी से आवेदन की स्थिति में शपथ पत्र और मजिस्ट्रेट का आदेश।
21 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन जरुरी
बच्चे के जन्म के बाद 21 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। तय समय में आवेदन करने पर प्रक्रिया आसान रहती है। देर होने पर कोर्ट से एफिडेविट (शपथ पत्र) बनवाना पड़ता है। इसके लिए अस्पताल की डिस्चार्ज पर्ची और माता-पिता के पहचान पत्र की जरूरत होती है। अगर बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में हुआ है तो अस्पताल से मिलने वाले जरूरी कागजात को संभालकर रखना चाहिए। इसमें बच्चे की जन्म पर्ची और डिस्चार्ज पर्ची काफी महत्वपूर्ण होती है।