जिले में तीन जल शोधन संयत्र (एसटीपी) लगाए जाएंगे। इसके लिए जगह चिह्नित कर लिया गया है।
भदोही के धौरहरा में 170 लाख लीटर, धसकरी में 50 लाख लीटर और औराई रोड पर रामपुर में 30 लाख लीटर की क्षमता वाला एसटीपी बनाया जाएगा।
शासन ने इसके लिए 127.26 करोड़ रुपये जारी किया है। नमामि गंगे परियोजना के इस कार्य को 21 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। जिले में गंगा, वरुणा और मोरवा नदीं है। वरुणा नदी उत्तरी छोर पर बहती है।
वहीं गंगा दक्षिणी छोर से होकर गुजरती है। मोरवा नदी जिले के बीचो बीच से होकर निकलती है। गंगा की सहायक नदी वरुणा और मोरवा नदी में दूषित पानी जाता है। जिले में 200 से अधिक कालीन कंपनियां हैं। वहीं 200 से 250 के बीच भट्ठे और औद्योगिक ईकाइयां हैं।
यहां से निकलने वाला दूषित पानी नदियों में जाता है। हालांकि कई कालीन कंपनियों में ईटीपी प्लांट स्थापित है। राजस्व विभाग ने पिछले दिनों पिपरी में छह बीघा व भिखारीपुर में चार बीघा सरकारी जमीन उपलब्ध करा दिया था।
जमीन के कागजात तैयार होने के बाद जिलाधिकारी व मंडलायुक्त से अनुमोदन कराया गया। इसके बाद प्रस्ताव शासन को भेजा गया था।
मोरवा नदी में रोजाना 200 से 250 लाख लीटर गंदा पानी गिरता है। जो आगे जाकर वरुणा नदी में समाहित होता है। वरुणा नदी गंगा में जाकर मिलती है। मोरवा में गिरने वाले प्रदूषित पानी को शुद्ध करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की योजना तीन साल पहले बनाई गई थी। जलनिगम, वाराणसी के एई विक्की कश्यप ने बताया कि भदोही में एसटीपी प्लांट बैठाने का तकनीकी ड्राफ्ट नमामि गंगे योजना कार्यालय नई दिल्ली भेजा गया है।
वहां से अनुमोदन होते ही एक सप्ताह के भीतर एसटीपी प्लांट की निविदा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।