गुजरे 24 घंटे के दौरान गंगा का जलस्तर तीन मीटर से अधिक बढ़ गया है। शुक्रवार को दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद देर शाम तक गंगा के जलस्तर में 11 सेमी. प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की गई। शाम को गंगा का जलस्तर 71.080 मीटर रिकार्ड किया गया। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में हड़कंप मच गया है। उत्तराखंड में बादल फटने के बाद नरौरा डैम से छोड़ा गया पानी मैदानी इलाकों में आफत मचाने की ओर बढ़ रहा है।
पिछले तीन चार दिनों की बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ाव शुरू हुआ। इसी बीच उत्तराखंड में हुई भारी बरसात के बाद नरौरा डैम में एकत्र पानी को भी छोड़ दिया गया। इससे हफ्तेभर के अंदर गंगा अपने इस साल के न्यूनतम जलस्तर 64.360 मीटर से सात मीटर ऊपर चढ़कर 71.080 मीटर के जलस्तर पर पहुंच गई। बृहस्पतिवार को शाम पांच बजे तक गंगा का जलस्तर 67.960 मीटर दर्ज किया गया था। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी स्थित कार्यालय के मुताबिक रात्रि 12 बजे 68.880 मीटर तक पहुंच गया। शुक्रवार को तड़के 69.050 मीटर गंगा का जलस्तर रिकार्ड किया गया। सुबह जलस्तर में 20 सेमी. प्रति घंटे की भारी-भरकम बढ़ोतरी हो रही थी। तेजी से किनारों की ओर बढ़ रही गंगा का जलस्तर सुबह आठ बजे 70 और शाम पांच बजे 71.080 मीटर तक पहुंच गया। बता दें कि जलस्तर 72 मीटर के ऊपर पहुंचने के बाद हालात बिगड़ने लगते हैं और कटान शुरू हो जाती है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से दूर है। प्रशासन के मुताबिक 82 मीटर पर गंगा खतरे के निशान पर पहुंचती है। माना जा रहा है कि एक दिन में तीन मीटर की यह बढ़ोतरी बनारस के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। यह पानी तीसरे दिन बनारस पहुंचेगा। तब वहां बाढ़ के हालात बन सकते हैं। जानकार बताते हैं कि जब-जब भदोही और इलाहाबाद की सीमा पर गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, इसका असर वाराणसी में देखने को मिला है।