पितरों के ऋण से मुक्ति, आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में विभिन्न अनुष्ठान होते हैं। जीवन में अपनों का दुत्कार झेलने वाले चार बुजुर्गों का वृद्धाश्रम में निधन होने के बाद भी तर्पण के नाम पर अपनों से एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ।
वृद्धाश्रम की देखरेख करने वाले प्रदोष पंडा ने बताया कि परिजनों को बुजुर्गों के निधन की सूचना दी गई। कोई काम का हवाला देकर तो कोई व्यस्त रहने का हवाला देकर बुजुर्ग पिता का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। बेटों ने पिता की परवरिश की लाज नहीं रखी।
इसके बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन की ओर से बुजुर्गाें का अंतिम संस्कार किया गया। वृद्धाश्रम में रहने वाले 105 बुजुर्गों में अब भी छह बुजुर्ग ऐसे हैं, जो पितृ पक्ष में अपने पितरों का तर्पण करने जाते हैं, लेकिन उनके निधन के बाद उनका तर्पण कौन करेगा। इस सवाल पर वे केवल मुस्करा देते हैं। वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग कहते हैं कि जीते जी तो बेटों के हाथ का पानी नसीब नहीं हुआ, अब मरने के बाद कौन आएगा। जीवन में बच्चों से कोई उम्मीद नहीं है। बताया कि गोपीगंज के खड़हट्टी मोहाल स्थित वृद्धाश्रम में इस समय 105 बुजुर्ग रहते हैं। जिनका देखभाल आश्रम प्रबंधन की ओर से किया जाता है। कोई बेटों के दुत्कार से यहां है तो किसी के अपनों ने ही उन्हें यहां छोड़ दिया है। कर्ताधर्ता राजन पंडा ने बताया कि वृद्धों के अंतिम संस्कार के लिए 4500 रुपये मिलता है।
निधन के बाद परिजनों को सूचना दी जाती है। परिजनों आते हैं तो आश्रम प्रबंधन की देखरेख में अंतिम संस्कार होता है।
अगर कोई नहीं आता है तो आश्रम प्रबंधन ही विधि विधान से अंतिम संस्कार करता है।