जिला अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल रेफर करने के मामले में स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। जिले में रेफलर सेंटर बने अस्पतालों की निगरानी दो सदस्यीय टीम करेगी।
दो सदस्यीय टीम गोपनीय तरीके से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी से इमरजेंसी वार्ड तक मरीजों पर नजर रखेगी। अगर डॉक्टर ने किसी मरीज को बेवजह रेफर किया है तो टीम संबंधित डॉक्टर की शिकायत दर्ज कराएगी।
जिले के सरकारी अस्पतालों से अक्सर मरीजों को रेफर करने का मामला सामने आता है। कई बार चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मरीजों को रेफर कर देते हैं।
कई बार डॉक्टर निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाने के लिए मरीजों को रेफर कर देते हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। जिला अस्पताल में बिचौलियों पर निगरानी के लिए सीएमओ ने दो सदस्यीय गोपनीय टीम गठित की है।
208 मरीज हुए रेफर : जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक 208 मरीजों को रेफर किया गया है। 20 दिसंबर 2024 से 20 मार्च 2025 तक 70 मरीजों को बीएचयू, मिर्जापुर, प्रयागराज रेफर किया गया है।
इसी तरह 20 दिसंबर से 20 जनवरी तक 37, 20 जनवरी से 20 फरवरी तक 31 और 20 फरवरी से 20 मार्च तक कुल 70 मरीज रेफर हुए हैं। खास बात है कि इनमें करीब 30 फीसदी मरीजों को बीच में ही निजी अस्पताल पहुंचा दिया गया। जिला अस्पताल में रोजाना 800 से 900 की ओपीडी होती है। वहीं 40 से 45 इमरजेंसी होती है।