ज्ञानपुर। अगर भारतवर्ष में रामचरित मानस का सस्वर पाठ आयोजित किया जाए तो यह सामान्य बात हो सकती है। लेकिन, क्या आप सोच सकते हैं कि सूरीनाम, मारीशस, दक्षिण अफ्रीका, ट्रिनिडॉड-टोबैगो, गुयाना, अमेरिका और फिजी जैसे देशों में भी रामचरित मानस का पाठ उसी श्रद्धा से किया जा सकता है, जैसे अपनेे देश में...। कोई धारणा बनाने से पहले जरा ठहरें। सात समंदर पार भी राम के प्रति श्रद्धा का सागर उसी वेग से हिलोरे मारता है। रविवार से दुनिया के सात देशों में श्रीरामचरित मानस के एक-एक कांड का पाठ शुरू हो गया है। पहले दिन भारत में बालकांड का पाठ किया गया, जिसका ऑनलाइन प्रसारण दुनियाभर में किया गया।
अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर की आधारशिला रखे जाने के बाद हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के प्रवासी भारतीयों में श्रीराम की भक्ति का उल्लास कुलांचें भरने लगा है। खास तौर पर कैरेबियाई देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच। गत 29 अगस्त को अयोध्या रिसर्च इंस्टीट्यूट, धर्मिनीज ऑफ ट्रिनिडॉड एंड टोबैगो और कैरेबिया में अवधि कल्चर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में दुनिया के सात देशों में ऑनलाइन रामायण पाठ के आयोजन का शुभारंभ हुआ। 30 अगस्त को भारत में बालकांड और 31 को सूरीनाम में अयोध्याकांड का पाठ किया गया।
एक सितंबर को मारीशस में भारतीय समयानुसार सुबह आठ बजे से अरण्यकांड, दो को साउथ अफ्रीका में सुबह साढ़े छह बजे से किष्किंधाकांड, तीन को ट्रिनिडाड-टोबैगो में 12.30 बजे से सुंदरकांड, चार को गुयाना में इसी समय पर लंका कांड और पांच सितंबर को न्यूयार्क एवं फीजी में क्रमश: 12.30 और शाम साढ़े चार बजे उत्तरकांड का पाठ किया जाएगा। कार्यक्रम में अहम भूमिका निभा रहे महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के उपकुलपति ज्ञानपुर के कारीगांव निवासी स्वामी ब्रह्मदेव और ट्रिनिडॉड-टोबैगो में कार्यक्रम की देखरेख कर रहीं साध्वी आनंदामयी गिरि ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि कार्यक्रम के लॉचिंग वेबिनार में यूपी के मुख्यमंत्री के अलावा संस्कृति और पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, गुयाना की मंत्री विंध्यवासिनी प्रसाद समेत देश-विदेश के तमाम शख्सियतों ने शिरकत की थी।