अमेरिकी कालीन बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा है। वहां के बड़े आयातक ही वर्तमान समय में भारतीय मार्केट को संभाले हुए हैं। मंदी के चलते ही अक्तूबर में प्रस्तावित इंडिया कारपेट एक्सपो की तारीखें अमेरिकियों को अनुकूल नजर नहीं आ रही हैं।
ये बातें गत दिनों अमरीका से होकर लौटे प्रमुख कालीन निर्यातक और कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के पूर्व प्रशासनिक सदस्य भरत लाल मौर्य ने बताई। भरत लाल मौर्य गत 13 जुलाई से लेकर 23 जुलाई तक अमरीका के दौरे पर थे। उन्होंने वहां 13 से 16 जुलाई को हुए एटलांटा शो में हिस्सा लिए।
भदोही पहुंच कर रविवार को उन्होंने बताया कि अमरीका ही भारत का सबसे बड़ा कालीन आयातक देश है। भारत में उत्पादित 50 प्रतिशत से अधिक कालीनों का खरीदार अमरीका ही है। इसलिए भारतीय कालीन उद्योग अमरीका पर अत्यधिक निर्भर है। उन्होंने बताया कि मंदी के चलते वहां के छोटे छोटे आयातकों की खरीदारी की शक्ति घटती जा रही है। इसलिए हमें बड़े आयातकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आगामी 3 से 6 अक्टूबर के मध्य वाराणसी में होने वाले इंडिया कारपेट एक्सपो की तिथियां अमेरिकी आयातकों से सामंजस्य बैठाकर नहीं तय की गई हैं। इससे अमरीका से हिस्सेदारी कम होने की आशंका खड़ी हो गई है।
इसी क्रम में बताया कि उनके एक अमेरिकी आयातक ने उन्हें बताया कि 2 से 4 अक्टूबर तक यहूदी नववर्ष मनाया जाता है। इसके अलावा 8 अक्टूबर को सबतसुवा का बड़ा पर्व है जो अमेरिकियों में बेहद लोकप्रिय है। कहा कि उनके खरीदार ने तो यहां तक कह दिया है कि वह इंडिया कारपेट एक्सपो
में भाग तो लेना चाहता था लेकिन अब उसकी भागीदारी संभव नहीं है। सीईपीसी के पूर्व प्रशासनिक सदस्य ने कहा कि फेयर की तिथियां घोषित करने से पूर्व इन सब बातों पर गौर करना चाहिए। क्योंकि अमरीका हमारा प्रमुख खरीदार देश है।