यूपी बोर्ड परीक्षा 2017 के लिए केंद्र निर्धारण नीति आ गई है। मानक से अधिक प्रवेश लेने वाले माध्यमिक और इंटरमीडिएट कॉलेजों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। नीति आने के बाद शिक्षा महकमा इसे प्रभावी बनाने के लिए जुट गया है। विभाग ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर रहा है जहां क्षमता से अधिक प्रवेश ले लिया गया है। सूत्रों की मानें तो एक दर्जन से अधिक विद्यालय इस बार केंद्र बनने से वंचित रह सकते हैं।
हर साल फरवरी- मार्च में शुरू होने वाली परीक्षा की तैयारी अक्टूबर- नवंबर से ही शुरू हो जाती है। आगामी बोर्ड परीक्षा को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कवायद शुरू कर दी है। बोर्ड ने केंद्र निर्धारण नीति को सभी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालयों को भेजकर उसे प्रभावी कराने के लिए निर्देशित किया है। नई नीति में ऐसे विद्यालयों को केंद्र न बनाने के लिए कहा गया है जिन स्कूलों में संसाधन से अधिक छात्र-छात्राओं का प्रवेश लिया गया है। शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों का लेखाजोखा जुटाने में लग गया है, जहां पर गड़बड़ी की गई है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो करीब 12 से 15 स्कूल केंद्र निर्धारण की नई नीति में फंस सकते हैं। इसमें डीघ के चार, औराई के दो, चौरी के दो, ज्ञानपुर का एक, अभोली के दो और सुरियावां के दो विद्यालय शामिल हैं। नई नीति से शिक्षा माफिया के उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बताते चलें कि जिले में कई स्कूल के प्रबंधक धारण क्षमता से अधिक प्रवेश लेते हैं। स्कूल के संसाधन 200 से 500 छात्र-छात्राओं के प्रवेश लायक होता है, लेकिन प्रबंधक एक हजार से अधिक एडमिशन लेते हैं।