खमरिया निवासी सर्राफा व्यवसायी ने एसबीआई घोसिया शाखा के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में दाखिल याचिका को कोर्ट ने स्वीकार कर ली। बैंक से ऋण लेने के बाद व्यवसायी ने सात करोड़ का स्टार्टअप प्रोजेक्ट शुरू किया था। व्यवसायी के अनुसार वह नियमित किस्त का भुगतान भी करता था। मामला उपभोक्ता आयोग में पहुंचने के बाद इसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद पीड़ित ने सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां उसकी याचिका स्वीकार कर ली गई।
खमरिया नगर निवासी रवि प्रकाश बरनवाल ने अपने ज्वेलरी फर्म के लिए एसबीआई की घोसिया शाखा से ऋण लिया था। व्यापारी के अनुसार वह बैंक के किश्तों का समय से भुगतान करता था। आरोप लगाया कि इस बीच उसने बैंक के उच्चाधिकारियों के सहयोग और सलाह पर बैंक के रिजनल ऑफिस वाराणसी द्वारा एक महत्वपूर्ण सात करोड़ का स्टार्टअप प्रोजेक्ट तैयार किया था और उसी पर काम कर रहे थे।
लेकिन घोसिया और ज्ञानपुर शाखा के बैंक अधिकारियों ने उसके ऋण खाते को एनपीए कर दिया और मकान पर कब्जा करने का नोटिस दाखिल कर कब्जा किया जाने लगा। इसके बाद पीड़ित ने ऋण वसूली अधिकरण प्रयागराज में 2021 में बैंक के खिलाफ वाद दायर किया। जहां बैंक की सारी कार्रवाई को विधि विरूद्ध बताते हुए कैंसिल कर दिया गया। मामला उपभोक्ता न्यायालय में पहुंचा तो फैसला उसके विपक्ष आया। जिस पर उसने पुनर्विचार याचिका दाखिल की जो अभी विचाराधीन है।
पीड़ित ने बैंककर्मियों की लापरवाही के विरूद्ध सीजेएम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर कोर्ट ने सभी बिंदुओं पर विचार कर याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख दो दिसंबर, 2024 को दी है।