प्रबोधिनी एकादशी का पर्व दूसरे दिन शुक्रवार को भी जिले के कई हिस्सों में मनाया गया। व्रती महिलाओं ने शालिग्राम और तुलसी विवाह कर मंगल की कामना की। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान दे पुण्य कमाया। शाम ढलते ही युवाओं ने आतिशबाजी के साथ घरों को दीये से सजा दिया। इस बार प्रबोधनी एकादशी का मान दो रह। जिले में कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार तो कुछ ने शुक्रवार को प्रबोधिनी एकादशी का पर्व मनाया। ज्ञानपुर, गोपीगंज, महराजगंज, औराई समेत कई इलाकों में बाजारों में गन्ना, कंद समेत फलफूल खरीदे गए।
इससे बाजारों में चहल-पहल रही। मान्यता है कि चार महीने क्षीर सागर में रहने के बाद प्रबोधनी एकादशी के दिन ही विष्णु भगवान जागते हैं। कई स्थानों पर मंडप बनाकर शालिग्राम -तुलसी की विधि विधान पूर्वक पूजा की गई। शुक्रवार को शाम के नगर के कई भवन दीप और झालर से सज गए। किन्ही कारणों से जिन परिवारों में दिवाली का पर्व नहीं मनाया जाता है वह एकादशी के दिन आतिशबाजी, दीप जलाते हैं।