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पॉलीथिन के कूड़े से होगी लंबी जंग

Sun, 20 Dec 2015 02:04 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
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 लंबे उपयोग के चलते हर घर की जरूरत बन चुके पॉलीथिन का सभी स्थानों पर प्रयोग हो रहा है, जिसे एक झटके में रोक पाना मुश्किल होगा। नगर और देहात में हर रोज करीब दो टन प्लास्टिक कूड़ा निकलता है, जिसका अपघटन न होने से प्रदूषण का दायरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।
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पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पॉलीथिन पर रोक को लेकर पहले से ही आवाज उठ रही है, लेकिन पूर्णतया रोक नहीं लग सकी। घरेलू सामान से लेकर सामान्य दिनचर्या तक में प्लास्टिक के सामान के बढ़ते प्रयोग से दायरा काफी व्यापक रूप ले चुका है।

प्रदेश सरकार की ओर से पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के बाद माना जा रहा है कि विकराल होती जा रही प्रदूषण की समस्या पर काफी हद तक रोक लगेगी। हालांकि जिले में कूड़े पर रोकथाम के लिए सभी को लंबी जंग लड़नी होगी।
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आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के सात नगर निकायों और 561 ग्राम पंचायतों में प्रतिदिन लगभग दस टन कचरा निकलता है, जिसमें दो टन से अधिक प्लास्टिक कचरा शामिल रहता है।

साफ-सफाई के बाद उक्त कचरे को चिन्हित स्थानों पर फेंक दिया जाता है, जहां का पूरा इलाका ही उसर हो जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. मोहम्मद सिकंदर ने कहा कि सरकार के फैसले का कड़ाई से पालन किया जाएगा। विभाग लगातार इस पर निगरानी रखेगा। पॉलीथिन पर रोकथाम के लिए प्रशासन और पुलिस का सहयोग लिया जाएगा।


इनसेट
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है पॉलीथिन
ज्ञानपुर। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर के वैज्ञानिक डॉ. एससी शुक्ला कहते हैं कि पॉलीथिन का प्रयोग बहुत ही खतरनाक है। सब्जी खरीदने से लेकर खाना आदि पैक कराकर ले जाना स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। उन्होंने बताया कि पॉलीथिन में क्रोमियम और निकिल जैसे जहरीले तत्व मौजूद  रहते हैं। उसके जलाने पर फ्यूरान और डाइआक्सीन जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। इससे कैंसर होने का जहां खतरा रहता है, वहीं सूर्य की किरणों से बचाने वाली ओजोन परत को भी क्षति पहुंचती है। पॉलीथिन का अपघटन 200 साल तक नहीं होता। जिस स्थान पर वह रहता है, वहां की मिट्टी बेकार हो जाती है। उन्होंने कहा कि सभी को इकोफ्रेंडली बनने की जरूरत है। दो दशक पूर्व तक लोग बैग लेकर बाजार जाते थे। जूट, कपड़े आदि का बैग लेकर ही सामानों की खरीदारी करने जाएं।
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