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कालीन कंपनी के नाम दर्ज जमीन तालाब खाते में की गई दर्ज

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ज्ञानपुर। लगभग 40 वर्ष से चल रहे विवाद को दूर कर औराई तहसील प्रशासन ने बहुचर्चित कालीन कंपनी ओबीटी के नाम दर्ज करीब 15 बीघे कीमती जमीन को तालाब खाते में दर्ज करा दिया है प्रशासन अब तालाब खाते की जमीन पर कंपनी के बने भवनों, कारखानों को लेकर आगे की रणनीति बनाने में जुट गया है। चुनाव के बाद उसे अमलीजामा पहनाया जाएगा। तहसील प्रशासन की इस कार्रवाई से हलचल तेज है।
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सूत्रों ने बताया कि 1932 में जमींदारी प्रथा लागू रहने के दौरान ओबीटी कंपनी की स्थापना जमीनों को लीज पर लेकर की गई थी। 1950 के बाद जमींदारी प्रथा में बदलाव आने पर जैसे-जैसे लोगों में भी जागरूकता आती गई, वैसे-वैसे कालीन कंपनी की मुश्किलें बढ़ती गईं। लगभग 40 वर्ष से सरकार बनाम ओबीटी का मामला न्यायालय में चला। तहसील प्रशासन के अनुसार, तालाब की जमीन पर कालीन कंपनी चलते पाए जाने पर लगभग छह पूर्व राजस्व टीम के साथ सीमांकन कराकर नोटिस जारी कर दी। कालीन कंपनी मैनेजमेंट के गले की फांस साबित होने की शंका में कंपनी कर्मचारियों ने फाइल को रिस्टोर नियम से ज्ञानपुर तहसील प्रशासन की निगरानी में लाकर शांत हो गया। एसडीएम औराई चंद्रशेखर ने बताया कि मामले में सामाजिक संस्था, कई काश्तकारों की ओर से मामला विचाराधीन था। कई खाते और सहखाते में विभक्त जमीनों की हकीकत देखने, अंतरिम रिपोर्ट लगाकर लगभग 15 बीघे जमीन को तालाब खाते में दर्ज करा दिया गया है। नियमानुसार आगे की कार्रवाई होती रहेगी।
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