ज्ञानपुर। सुरियावां ब्लॉक के जमुनीपुर अठगवां में लाखों की जालसाजी में जेल में निरुद्ध ग्राम पंचायत अधिकारी संतोष कुमार सिंह को कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। जमानत प्रार्थना पत्र को सेशन कोर्ट ने निरस्त कर दिया।
ग्राम पंचायतों के बेहतर विकास के लिए सरकार राज्य वित्त, चौदहवें वित्त और स्वच्छता मिशन के मद में हर साल करोड़ों खर्च करती है। जिले की 561 ग्राम पंचायतों में से कुछ को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर प्रधान और सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। सत्ता-शासन से संरक्षण प्राप्त करने वाले कुछ सचिव तो नियमों को ताख पर रखकर सरकारी बजट में बंदरबाट करने से भी गुरेज नहीं किए। जिले की बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल जमुनीपुर अठगवां में फर्जी हस्ताक्षर से करीब 45 लाख से अधिक की धनराशि बैंक से निकालने के आरोप सचिव संतोष सिंह पर लगाए गए। जांचोपरांत सेक्रेटरी और प्रधान के एक बेटे पर जालसाजी समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया।
17 दिन पूर्व भदोही पुलिस ने सेक्रेटरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सेक्रेटरी के अधिवक्ता ने जमानत के लिए जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। आरोपी सेक्रेटरी के अधिवक्ता ने दलील रखी कि अभियुक्त सरकारी कर्मी है। कथित प्रकरण में उसकी कोई भूमिका नहीं है। आपसी विवाद में उसे फंसाया गया जबकि शासकीय अधिवक्ता ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया। कहा कि सह अभियुक्त की जमानत याचिका निरस्त हो चुकी है। केस डायरी में संलग्न 28 चेकों पर ग्राम प्रधान कलावती देवी के हस्ताक्षर न होने की पुष्टि विधि विज्ञान प्रयोगशाला से हो चुकी है। जमानत स्वीकार करने का आधार पर्याप्त नहीं है। दोनों अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद जिला जज अनिल कुमार प्रथम ने सचिव की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।