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Bhadohi News: कल से शुरू होगा अंतिम अशरा, एतेकाफ में बैठेंगे सैकड़ों मुसलमान

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हाफिज अश्फाक रब्बानीस्रोत- स्वयं
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भदोही। मुकद्दस रमजान में दस-दस दिन के कुल तीन अशरे होते हैं। पहला अल्लाह की रहमतों का, दूसरा गुनाहों से मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से निजात दिलाने वाला होता है। पहला अशरा 10वें रोजे के साथ खत्म हो चुका है, जबकि दूसरा अशरा भी कल मंगलवार को बीसवां रोजा पूरा होने के साथ ही खत्म हो जाएगा। बुधवार को इक्कीसवें रोजे के साथ ही तीसरा और अंतिम अशरा शुरू होगा। इसी अशरे में सैकड़ों लोग मस्जिदों में एतेकाफ में बैठेंगे।
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कुजड़ाने वाली मस्जिद के पेश इमाम हाफिज अश्फाक रब्बानी ने कहा कि अंतिम अशरा सबसे महत्वपूर्ण होता है। सोमवार की शाम को चांद निकलने के साथ दूसरा अशरा पूरा हो जाएगा। दूसरे अशरे में हम सबने रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ की। कहा कि वैसे तो पूरे रमजान महीने में अल्लाह की तरफ से मोमिनों के लिए रहमतें बरसती हैं। बुधवार से शुरू हो रहे तीसरे अशरे में इबादत का दौर तेज हो जाता है। कहा कि तीसरा अशरा 21वें रोजे की मगरिब से शुरू होता है और ईद का चांद नजर आने तक चलता है। इस अशरे में इबादत करने से जहन्नुम से आजादी मिलती है। बताया कि तीसरे अशरे की शुरूआत से ही मस्जिदों में एतेकाफ में बैठने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। ये दस दिन अल्लाह अपने बंदों को इबादत का सबसे अच्छा अवसर प्रदान करता है। इसे ही एतेकाफ कहा जाता है। हाफिज अश्फाक ने बताया कि तीसरे अशरे में ताक रातों में एक शब-ए-कद्र भी आएगी जो किसी को नहीं मालूम इसलिए अंतिम अशरे की 21, 23, 25, 27 और 29वीं रात को रात भर जग कर इबादत की जाती है ताकि शब-ए-कद्र की रात मिल जाए। बताया कि एक शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। इसलिए अब असली इबादत का समय आ गया है।
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