करीब दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाले जिला चिकित्सालय और सरपतहां के सौ शय्या अस्पताल में एक भी ईएनटी के डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए भदोही के महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल या निजी अस्पताल का रूख करना पड़ता है।
जिले में कुल चार पद सृजित है। जिले के 29 सरकारी अस्पतालों में रोजाना 5000 से 5500 की ओपीडी होती है। इसमें से करीब 100 से 125 मरीज ईएनटी के होते हैं। ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल आते हैं। यहां 18 महीने पहले ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिप्ती पांडेय की तैनाती हुई थी, लेकिन उनका तबादला भदोही एमबीएस हो गया। जिससे अस्पताल में पद खाली है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ता है या किसी अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। सौ शय्या अस्पताल में दो पद सृजित है। यहां तीन साल से नाक, कान, गला के डॉक्टर नहीं है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार कराने में परेशानी होती है। उन्हें विशेषज्ञ के बजाए अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल या महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय का रूख करना पड़ता है। भदोही एबीएस में एक डॉक्टर की तैनाती है।