चैत्र नवरात्र में बृहस्पतिवार को नवदुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की उपासना की गई। इस दौरान देवी मंदिरों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जगत जननी के दर्शन-पूजन के लिए सुबह से शाम तक देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। घोपइला देवी मंदिर पर जहां हजारों श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई, वहीं सीतामढ़ी स्थित सीता समाहित स्थल पर भी बड़ी संख्या में आस्थावान पहुंचे।
चैत्र नवरात्र में जिले के नगर और गांवों का वातावरण भक्तिभाव में डूब गया है। हर तरफ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ही देवी मंदिरों पर मां के जयकारे हो रहे हैं। घर-घर कलश स्थापना कर दुुर्गा सप्तशती पाठ और आदिशक्ति की उपासना के नौ दिनी अनुष्ठान चल रहे हैं। धनापुर स्थित विधायक आवास पर सहस्रचंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया है। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन काशी से आए काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यास परिषद सदस्य पं. राजकृष्ण मालवीय के नेतृत्व में 151 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ कराया। इस मौके पर आचार्य ने यज्ञ शब्द की व्याख्या की। कहा कि नवरात्र में दैवीय शक्तियों की उपासना जीव का धर्म है। कहा कि यह यज्ञ नवरात्र की नवमी तक चलेगा। दूसरी ओर जिले में श्रीराम नवमी की तैयारियां भी तेज हो गईं हैं। जिला मुख्यालय ज्ञानपुर समेत जिले के तमाम नगर और कस्बे केसरिया रंग के झंडों से रंग गए हैं। जगह-जगह धार्मिक आयोजन और जय श्रीराम के जयघोष वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। ग्रामीण इलाकों में भी नवमी की धूम मची है। तमाम गांवों में युवाओं ने आपस में मिलकर नवमी पूजन की व्यवस्था की है।