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कल्पवास ः सर्द हवाओं के बीच भगवत भजन

Wed, 14 Jan 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो ज्ञानपुर अमर उजाला
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 काशी, प्रयाग और  विंध्य के मध्य में उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित बाबा सेमराधनाथ धाम में कल्पवास का दायरा साल दर साल बढ़ता जा रहा है।
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 एक दशक पूर्व कुछ क्षेत्र में शुरू       होकर अब एक किमी के दायरे में तंबुओं की नगरी फैल गई है।  माह भर यहां भक्तिमय वातावरण        रहता है और कल्पवासी भगवत भजन-कीर्तन में रमे रहते हैं।

 मान्यता है कि यहां आने वाले    लोगों की मनोकामनाएं पूरी   होती हैं।
सेमराधनाथ धाम में स्व. रामशरण दास ने 1996 कल्पवास का शुभारंभ किया था। उस समय 20 से 25 कल्पवासियों के संग मकर माघ मेले की शुरूआत हुई।

 करीब दो दशक गुजरते-गुजरते दायरा अधिक बढ़ गया है। वर्तमान समय में सेमराधनाथ कल्पवास में 300 से 400 तंबु एक किमी के दायरे में सज गए हैं।

मखमली रेत पर एक माह तक भजन कीर्तन में तल्लीन होकर कल्पवास प्रभु को याद करते हैं। भदोही के अलावा इलाहाबाद के सीमावर्ती, विंध्य क्षेत्र के कई गांवों से कल्पवास करने के लिए लोग पहुंचते हैं।
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 सेमराधनाथ में लगने वाले कल्पवास मेले को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता ही जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व के वर्षों की  भांति यहां आकर कल्पावास  करने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
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पौराणिक इतिहास को अपने में समेटे बाबा सेमराधनाथ धाम को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिससे कि यह क्षेत्र अभी भी उपेक्षित है।  मेले को जनप्रतिनिधियों का  सहयोग मिला तो आने वाले समय में     बाबा सेमराधनाथ धाम और         यहां का कल्पवास विश्व पटल पर छा जाएगा।
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