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भदोही के स्वास्थ्य विभाग का गोलमाल आया सामने, 12 हजार के सिलिंडर की 54 हजार में हुई खरीद

Sat, 29 May 2021 10:58 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, भदोही

सार

  • आक्सीजन सिलिंडर: 30 किमी में बढ़ गई 42 हजार कीमत
  • डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच, कइयों की फंसेगी गर्दन
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अॉक्सीजन सिलिंडर। (फाइल फोटो)
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विस्तार
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अक्सर किसी न किसी मामले को लेकर सुर्खियों में रहने वाला भदोही जिले का स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर विवादों में घिर गया है। ताजा मामला आक्सीजन सिलिंडर की खरीद का है। मिर्जापुर में जिस सिलिंडर को 12 हजार रुपये में स्वास्थ्य विभाग ने खरीदा. वहीं जिले में 54 हजार रुपये में खरीद की गई। मात्र 30 किमी की दूरी में 42 हजार रुपये कीमत बढ़ गई। मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने सीडीओ को जांच सौंप दी है। माना जा रहा है कि इसमें कई लोगों की गर्दन फंस सकती है।

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वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर ने जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है। संक्रमण की रोकथाम और लोगों को जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एल-2 अस्पताल समेत छह निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाया गया। दूसरी लहर में संक्रमित मरीजों को सबसे अधिक जरूरत आक्सीजन की पड़ी। इस दौरान सीएमओ की निगरानी में ही आक्सीजन की खरीद शुरू की गई। 

पहले ही घूसखोरी को लेकर विवादों में रहने वाला जिले के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की सांसों का भी सौदा कर लिया। आक्सीजन सिलिंडर की खरीद में जमकर लूट हुई। मिर्जापुर सीएमओ ने जिस एजेंसी से सिलिंडर 12 हजार 400 रुपये में खरीदा वही सिलिंडर जिले की सीएमओ ने 54 हजार रुपये में लिया। सबसे अहम बात है कि जिस सिलिंडर को रिफलिंग के लिए भेजा गया वह आक्सीजन की बजाए नाइट्रोजन का था।

इन सिलिंडर में आक्सीजन भरने वाली एजेंसी ने लौटा दिया। मामला संज्ञान में आने पर डीएम आर्यका अखौरी ने सीडीओ भानु प्रताप सिंह को जांच सौंप दी है। यदि इस मामले की ढंग से जांच हुई तो कई लोगों की गर्दन फंस सकती है। शनिवार को लखनऊ में आप सांसद संजय सिंह ने भी प्रेसवार्ता कर भदोही सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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बाबुओं के मकड़जाल में उलझा विभाग

यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व भी स्वास्थ्य विभाग में कई खामियां सामने आ चुकी है। सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग में दशकों से जमे तीन बाबुओं पर नियुक्ति, स्वास्थ्य उपकरण की खरीद से लेकर सीएचसी, पीएचसी के जीर्णोद्धार समेत अन्य कार्यों की जिम्मेदारी रहती है। संस्था से तालमेल से लेकर कमीशन तक का पूरा कामकाज यही बाबू देखते हैं। सचिवालय से लेकर निदेशालय तक सभी की सेटिंग भी इन पर निर्भर रहती है। आलम यह है कि कोई सीएमओ अगर इनकी नहीं सुनता तो उनका तबादला भी तय रहता है। इसका शिकार तीन पूर्व सीएमओ रह चुके हैं।
 

इस मामले की जांच की जा रही है। दो दिन में रिपोर्ट डीएम को दे दी जाएगी। - भानुप्रताप सिंह , सीडीओ, भदोही

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