प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उम्मीद की आस लगाए लोगों की मुराद पूरी हुई तो सुरियावां और अभोली ब्लॉक के अलावा जौनपुर जिले की सैकड़ों ग्रामसभाओं की किस्मत बदल जाएगी। भदोही तहसील की 35 किमी दूरी इन क्षेत्रों के वादकारियों के लिए समस्या का सबब बन गई है। राजस्व के हिसाब से तो सरकार को ज्यादा फायदा नहीं दिखता, लेकिन आम लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। जौनपुर जिले के सीमावर्ती गांव के लोगों को भी मड़ियाहूं तहसील जाने के लिए 35 से 40 किमी का सफर तय करना पड़ता है, सुरियावां तहसील बना तो यह दूरी सिमटकर 10 किमी में आ जाएगी।
22 जून 1994 को जनपद सृजन के बाद जिले में मात्र दो तहसीलें बनीं, जिनमें भदोही और ज्ञानपुर शामिल रहीं। भाजपा सरकार में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री रंगनाथ मिश्र के प्रयास से औराई को तहसील बनाया गया। भदोही तहसील में ही तीन ब्लॉक अभोली, सुरियावां और भदोही हैं। अभोली और सुरियावां के सीमावर्ती पाली, महजूदा, दानूपुर, मतेथू, बसवापुर, अभोली, दुर्गागंज, कुढ़वा, अभियां, प्रयागपुर, हरिहरपुर, सांडा, बहुता चकडाही सहित करीब 150 से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां से भदोही तहसील की दूरी 35 किमी के करीब है। दोनों ब्लॉक से सरकारी राजस्व लगभग 30 लाख ही सालाना मिलता है, लेकिन जनता की दिक्कतों को देखते हुए डेढ़ दशक से सुरियावां को तहसील बनाने की मांग की जा रही है। सुरियावां तहसील बना तो जौनपुर जिले के मीरगंज, जरौना, कटवार, निगोह, बरसठी, रामपुर, आलमगंज बाजार समेत 100 से अधिक ग्राम सभाएं भी इसमें शामिल की जा सकती हैं।
वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने जौनपुर जनपद के निगोह को तहसील बनाते हुए उसे भदोही जिले में शामिल किया था, लेकिन विरोध के चलते तीन माह में उसे समाप्त कर दिया गया। अब पूर्व सीएम के बेटे वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लोगों ने उम्मीद लगा रखी है। 25 मई को सीएम लोगों की उम्मीदों को पंख लगाएंगे या नहीं यह तो समय बताएगा।