कमिश्नर ने जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में आपरेशन कम होने पर नाराजगी जताई। इस पर उन्होंने जिले के छह सर्जनों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की। उसके बाद औराई ब्लाक में गोद लिए गांव उपरौठ और लोहिया गांव दिघवट में चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी।
मंडलायुक्त अनिल कुमार शुक्रवार को दोपहर 12 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में ओपीडी, आपातकालीन कक्ष, दवा वितरण कक्ष, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड कक्ष का अवलोकन किया। विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों से रूबरू हुए और सुविधाओं के बारे में बातचीत की। अस्पताल में ओपीडी की स्थिति ठीक रही, लेकिन सर्जरी की स्थिति खराब मिली। आठ माह में जिले में मात्र 49 आपरेशन किए गए थे।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने छह सर्जनों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पण्ी का आदेश दिया। इसमें एक जनरल सर्जन, दो नेत्र सर्जन और एक नाक,कान आैर गला तथ्ाा एक आर्थोपेडिक सर्जन शामिल हैं। रेडियोलाजिस्ट की व्यवस्था न होने पर मंडलायुक्त ने कहा कि जल्द ही उसकी व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने सीएमओ और सीएमएस को हिदायत दी कि अस्पताल में मरीजों के साथ मधुर व्यवहार रखा जाए। सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का अधिक लाभ उन्हें मिले। अस्पताल परिसर में बेतरतीब खड़े वाहनों और साइकलों को व्यवस्थित रखवाने के लिए निर्देशित किया। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निजी कंपनी से सुरक्षाकर्मी या पीआरडी जवानों की तैनाती के लिए कहा। इसके बाद मंडलायुक्त औराई ब्लाक के गोद लिए गांव उपरौठ में पहुंचे। यहां पर कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का वजन कराकर देखा। अप्रैल महीने में किए गए निरीक्षण से 50 फीसदी सुधार मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मनमानी पर नाराजगी जताई। बच्चों के रूट चार्ट पर वजन बिना जांच के भरा हुआ मिला। जिन बच्चों का वजन चार किलो था, उसे आठ किलो दर्शाया गया मिला। इसके बाद उन्होंने डा. राम मनोहर लोहिया गांव दिघवट में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी।
गांव के वनवासी बस्ती के लोगों ने दुखड़ा सुनाया तो मंडलायुक्त ने एसडीएम को सरकारी सुविधाएं दिलाने का निर्देश दिया। मंडलायुक्त ने सीसी रोड, हैंडपंप, अनाज वितरण, एमडीएम, यूनिफार्म वितरण सहित अन्य योजनाओं की समीक्षा की। इस मौके पर जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु, एसपी अनिल कुमार राय, सीडीओ आरपी मिश्रा, बीएसए डा. सत्य प्रकाश त्रिपाठी, डीपीआरओ रामआसरे दूबे सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।