सीतामढ़ी। जिले के अति पिछड़े क्षेत्र डीघ ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है। करीब 98 से अधिक गांव के लोगों के उपचार के लिए बना सीएचसी डीघ में परिवार नियोजन और आपरेशन तक व्यवस्था सिमट कर रह गई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण ग्रामीणों का समुचित उपचार नहीं हो पाता। करीब दो से ढाई लाख की आबादी वाले क्षेत्र डीघ में कोइरौना बाजार के समीप डीघ सीएचसी स्थिति है। वैसे तो लोगों को यहां संतोष जनक स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कोरोना काल में ग्रामीणों की तकलीफें बढ़ गई हैं।
डीघ सीएचसी की स्थिति पर गौर करें तो यहां पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से लेकर जनरेटर तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में वर्षों से आई एक्स-रे मशीन का इंस्टालेशन तक नहीं हो सका है। जिससे काफी महंगी मशीन एक कोने में धूल फांक रही है। इसी तरह मेडिसिन और जनरल सर्जन तक कि नियुक्ति नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट, दंत रोग और आंख के भी डॉक्टर नहीं हैं। एएनएम की भी कमी है। इस महत्वपूर्ण अस्पताल का नया जेनरेटर सेट वर्षों से ज्ञानपुर जिला अस्पताल में सेवा दे रहा है। अस्पताल के लोग बताते है कि एक पुराना जर्जर जनरेटर है जो किसी तरह चलता है कभी बाजार से किराए पर जनरेटर लेना पड़ता है। परिसर की साफ-सफाई ठीक नहीं है।
डीघ सीएचसी 30 बेड का अस्पताल है और अधीक्षक सहित कुल सात डॉक्टरों की नियुक्ति है, लेकिन कई डॉक्टर अपनी मनमर्जी के अनुसार अस्पताल में आते है। खास बात यह है कि परिवार नियोजन आपरेशन को छोड़ दें तो यहां के बेड मरीजों से कभी कभार ही भरते हैं। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए दो बेड की अस्थायी व्यवस्था की गयी है। अस्पताल में औसतन डेढ़ सौ से दो सौ तक मरीजों की ओपीडी प्रति दिन हुआ करती थी, लेकिन कोरोना काल में ओपीडी बंद होने से विभिन्न रोगों के मरीज परेशान हैं।
सीएचसी डीघ के अधीक्षक डॉ.अमर बहादुर पटेल का कहना है कि सब कुछ ठीक है। कहा कि मेडिसिन और जनरल सर्जरी के विशेषज्ञ नहीं हैं। इसी तरह अस्पताल में जनरेटर की दिक्कत है। सीएचसी में कुल सात डाक्टर सहित कई स्टाफ है। कहा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए दो बेड की व्यवस्था है। ऐसे मरीजों को घंटे दो घंटे उपचार और आक्सीजन के बाद भदोही भेज दिया जाता है।