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Bhadohi News: गर्मी की एंट्री, 1250 हैंडपंप से पानी लापता

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चौरी के चांदी गहना में खराब हैंडपंप । संवाद - फोटो : एसएसबी मुख्यालय में मिलेट्स मेले में लगे स्टॉल का निरीक्षण करती संदीक्षा अध्यक्ष।
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जिले में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। गर्मी के दस्तक देते ही जल संकट गहरा गया है। 1250 हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है। इनमें से अधिकतर हैंडपंप माननीयों की निधि से लगाए गए हैं। मरम्मत के नाम पर ग्राम पंचायतें बजट का बंदरबाट कर रही हैं। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं विभाग ने खराब हैंडपंप का रिबोर और मरम्मत कराने का दावा किया है। विभाग के अनुसार, जिले में कुल 546 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें बीते दो दशक में विधायक, सांसद, जिला पंचायत, प्रमुख, एमएलसी निधि से 62 हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं। दो दशक पूर्व लगे हैंडपंप का जलस्तर नीचे जाने एवं तकनीकी दिक्कत के कारण हर साल हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर फरवरी और मार्च में पंचायत राज विभाग की तरफ से गांवों में खराब हैंडपंप का सर्वे कराया गया। इसमें 450 हैंडपंप रिबोर लायक और आठ सौ मरम्मत लायक मिले। विभाग का दावा है कि हैंडपंपो को सही करा लिया है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। अब भी विद्यालय, सार्वजनिक स्थानों, छोटे बाजारों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रो में हैंडपंप सूखे हुए हैं। इससे बच्चों और ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। एक हैंडपंप के रिबोर में 32 हजार और मरम्मत पर दो से ढाई हजार रुपये खर्च किया जाता है। फिर भी किसी हैंडपंप का रॉड खराब है तो किसी से दूषित पानी आ रहा है। मंगलवार को औराई के सारीपुर, ठेगीपुर, अभोली के अभोली, गुआली, चौरी के चांदी गहना में हैंडपंप की पड़ताल की गई। अधिकतर हैंडपंप खराब मिले। विभाग के मुताबिक जिले की ग्राम पंचायतों में खराब होने वाले हैंडपंप को सही करने में हर साल औसतन दो से ढाई करोड़ रुपये तक खर्च होता है। अप्रैल में ही उनको सही करना होता है। हकीकत है कि मई में भी हैंडपंप खराब पड़े हैं। जून, जुलाई तक लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। हैंडपंप खराब होने पर उसे रिबोर (पुनः बोरिंग) करने की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया जलस्तर को बनाए रखने या सुधारने के लिए की जाती है। गांव में ग्राम निधि से इसे कराया जाता है। इस पर 32 हजार तक खर्च आता है। कई ग्राम पंचायतों में रिबोर के नाम पर बजट में खेल भी होता है। पूर्व में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। घसकरी, परगासपुर, बेरवा पहाड़पुर, गोलखरा, जाठी समेत कई प्रधानों की कुर्सी तक जा चुकी है। 25 से अधिक मामलों की जांच चल रही है। भूगर्भ जलस्तर में सुधार के लिए वर्षा जल संचयन का प्रयास किया जा रहा है। विभागीय उदासीनता के कारण यह प्रभावी नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि एक दशक में अत्यधिक जल दोहन के कारण जिले का भूगर्भ जलस्तर करीब डेढ़ से तीन मीटर तक नीचे खिसक गया है। इसके पीछे व्यवसायिक आरओ प्लांट भी मुख्य कारण है।
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प्रभारी डीपीआरओ ज्ञान प्रकाश ने बताया कि खराब हैंडपंपो को सही कराया गया है। जहां नहीं सही हुए उन्हें भी सुधारा जाएगा। बीडीओ, सचिव को विशेष निर्देश दिया गया है। जल्द ही बैठक बुलाकर अब तक की प्रगति की रिपोर्ट ली जाएगी। -
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