लगभग 70 की संख्या में छात्राओं के दल का नेतृत्व डा.रंजना सेठ कर रही थीं।
संस्थान के निदेशक प्रो.केके गोस्वामी ने दल का स्वागत किया । कहा कि अध्ययनरत छात्राओं में हमेशा कुछ न कुछ जानने की ललक बने रहना सफलता की गारंटी है। छात्राएं परंपरागत रूप से कालीनों की डिजाइन, उलेन यार्न की रंगाई को देखा। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि कालीन इतने सुंदर और आकर्षक होते हैं।
कालीनों निर्माण की जटिल प्रक्रिया देख छात्राओं के मन में भी कई सवाल उठे जिसके बारे में उन्होंने निदेशक से सवाल किए। रंगाई कितना मुश्किल से हो पाता है और एक कालीन बनाने के पीछे कितने लोगों की मेहनत होती है यह भी छात्राएं देख स्तब्ध रह गईं। डिजाइनिंग प्रक्रिया देख उनकी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है?
इस दौरान मौजूद कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रशासनिक सदस्य इस्तियाक खां अच्छू ने भी छात्राओं को निर्माण और मार्केटिंग के बारे में जानकारी दी। एसके पाल, हिमांशु महापात्र, मौमिता बेरा, बीसी रे, एसके पांडेय, राजीशीष कर्माकर, चंद्रशेखर बाजपयी, मुमताज अंसारी आदि रहे।