ज्ञानपुर नगर में सड़क पर टहल रहा गो वंश। संवाद
ज्ञानपुर। जिले में हाईवे से लेकर मुख्य मार्गों तक छुट्टा गोवंश लोगों की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। एक के बाद एक हादसे होने के बाद भी जिम्मेदार लापरवाह बने हैं। सड़कों, बाजारों और खेतों पर इनका कब्जा है, लेकिन इन्हें पकड़ने वाला पशुपालन विभाग और गोपीगंज पालिका का कैटिल कैचर बीमार है। कैचर दफ्तर के परिसर में खड़े रहते हैं। शनिवार को हमारी टीम ने खमरिया, ज्ञानपुर और गोपीगंज के मुख्य तिराहे-चौराहों की पड़ताल की। यहां तीन से सात की संख्या में गोवंश विचरण करते मिले। गोपीगंज के खरहट्टी मोहाल में सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ रहती है। शनिवार दोपहर गोवंश के हमले से ठेले व्यापारी का अनारसा गिर गया।
गोवंश उसे मारने दौड़ा, आसपास के लोगों ने उसे भगाया। खमरिया नगर के मुख्य बाजार और जायसवाल मार्केट में हमेशा गोवंश घूमते रहते हैं। जिले की तीन स्थायी और 29 अस्थायी गोशालाओं में करीब 6500 गोवंश संरक्षित हैं। एक गोवंश के भरण-पोषण पर शासन से संचालक को 50 रुपये प्रतिदिन दिए जाते हैं। तमाम कवायद के बाद भी बाजार से लेकर खेत-खलिहान तक टहल रहे गोवंश को गोशाला तक पहुंचाने में प्रशासनिक अफसर फेल हैं। पशुपालन विभाग से लेकर निकायों के अधिकारी और बीडीओ आदि भी छुट्टा गोवंश को गोशाला तक लाने की जहमत नहीं उठाते। इससे कई गोवंश लोगों की जान भी ले रहे हैं। गोपीगंज के अमवां में शुक्रवार की रात हुई घटना तो एक बानगी भर है। इसके पूर्व भी गोवंश के हमलों में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कुछ लोग हाथ-पैर तुड़वाकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। सड़कों पर कई हादसे इन गोवंश के कारण होते हैं।
गोपीगंज के रामपुर घाट मार्ग पर पांच की संख्या में गोवंश खड़े मिले। अगल-बगल से गुजरने वाले लोग बचकर निकलते दिखे। उक्त मार्ग पर दिनभर लोगों का आवागमन रहता है। सभी को डर था कि कहीं हमला न कर दे।
गोपीगंज के खरहट्टी मोहाल में छुट्टा गोवंश ने कई दुकानों का सामान खा लिया। किसी तरह उसे वहां से हटाया गया। यह स्थिति प्रतिदिन रहती है। अमवां में छह से सात की संख्या में हर समय गोवंश विचरण करते रहते हैं।
न डीजल, न चालक, कैसे चले कैचर
पशुपालन विभाग का कैटिल कैचर वीआईपी फोन आने पर ही बाहर निकलता है। इसके बाद वह आराम करता है। 2024 में जिला पंचायत विभाग की तरफ से कैटिल कैचर पशुपालन विभाग को उपलब्ध कराया गया था। पशुपालन विभाग के पास न डीजल के लिए कोई मद है, न ही इसका चालक है। इसके लिए आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।
सूचना मिलने पर पशुपालन विभाग की ओर से गोवंश को पकड़कर गोशाला भेजा जाता है। अगर कहीं समस्या है तो उसे दूर किया जाएगा। - एके सचान, सीवीओ पशुपालन