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कहीं अल्ट्रासाउंड बंद तो कुछ जगहों पर जंग खा रही एक्स-रे मशीन

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सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती करके वहां लाखों रुपये के उपकरण लगाए जाते हैं, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें, लेकिन कालीन नगरी में उपकरणों की देख-रेख ठीक से नहीं होने और विभागीय उदासीनता की वजह से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कहीं रखे-रखे मशीनों में जंग लग गए हैं तो कुछ जगहों पर कहीं महीनों से आई मशीन से काम शुरू नहीं किया जा सका है। जहां सब कुछ है, वहां मशीन का ही अभाव है। इस वजह से मरीजों को कभी जिला मुख्यालय तो कभी प्राइवेट अस्पतालों में जाकर महंगे दर पर इलाज कराना पड़ता है।
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सुरियावां सीएचसी पर छह वर्ष पहले एक्स-रे मशीन आई, लेकिन मशीन चालू नहीं किया जा सका है। यहां के अधीक्षक डॉ. आरबी पाठक का कहना है कि जिस कंपनी ने एक्सरे मशीन भेजी है, आज तक चालू नहीं किया। कई बार कंपनी को पत्र लिखा गया तो भी नहीं चालू किया गया। एक्स-रे तकनीशियन की नियुक्ति भी हुई थी, हालांकि अब उसका स्थानांतरण ज्ञानपुर जिला अस्पताल हो गया है। भदोही के एमबीएस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन दस वर्ष पूर्व से रखी हुई है। रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति का इंतजार 10 वर्ष तक होता रहा। कुछ माह पहले ज्ञानपुर के रेडियोलॉजिस्ट को दो दिन के लिए तैनात किया गया तो पता चला कि मशीन ही खराब हो चुकी है। सीएमएस डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि इस मामले से शासन को अवगत करा दिया गया है। मशीन ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। सीएचसी औराई में एक्स-रे, मेमोग्राफी, ईको मशीन नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक अंबरीश सिंह ने बताया की एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जैसी मशीनों की आवश्यकता है। औराई सीएचसी में आर्थो, बच्चों के डॉक्टर, जच्चा बच्चा स्पेशलिस्ट, एमडी मेडिसिन, सर्जन आदि उपलब्ध हैं। अच्छे डॉक्टरों के लिए हर तरह की मशीनें और उसके टेक्निशियन उपलब्ध रहेंगे तो आने वाले मरीजों की परेशानी कम की जा सकती है।
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