चार अक्तूबर से भदोही में 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो शुरू होगा। बीते एक दशक में कालीन उद्योग ने भले ही तमाम बदलाव देखे हैं, लेकिन हस्तनिर्मित इन मखमली कालीनों को सहेजने का काम कुशल बुनकरों ने किया है।
कालीन की इस विरासत को सहेजने वाले बुनकरों की आंखे इतनी तेज होती हैं कि एक-एक गांठ में उनका हुनर निखर कर सामने आता है। कोई 13 तो कोई 17 साल की उम्र से कालीन बुनाई का काम कर रहा है।
40 साल से कालीन की बुनाई कर रहे बुनकरों के काम में पहले की अपेक्षा थोड़ी सुस्ती आई है, लेकिन कारीगरी में अब भी कोई कमी नहीं है। 80 साल की उम्र में अपनी पारखी नजर से कालीन में जान डालने का काम कर रहे हैं। बुनकरों का कहना है कि आठ आने, 12 आने और एक रुपये में दिहाड़ी पर बुनाई का काम शुरू किया था।