ज्ञानपुर। जिले की मिट्टी की सेहत खराब हो गई है। मिट्टी में जीवाश्म कार्बन की भारी कमी पाई गई है। आयरन, नाइट्रोजन, फास्फोरस का स्तर भी बेहद कम हो गया है। इसका सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ रहा है। उधर कोविड काल में मृदा परीक्षण बंद होने के दो साल बाद फिर शुरू हो गया है। मिट्टी की स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 12 गांवों का चयन किया गया है।
घरांव स्थित मृदा प्रयोगशाला के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की मिट्टी में जीवाश्म कार्बन की भारी कमी पाई गई हैै। जीवाश्म कार्बन मिट्टी के लिए वही भूमिका निभाता है, जो मानव शरीर में खून की अहमियत है। इसकी कमी से नाइट्रोजन, पौटैशियम, सल्फर, मैनीज, बोरान जैसे 16 पोषक तत्व कम होने लगते हैं। स्वस्थ मिट्टी में जीवाश्म कार्बन 0.8 पीपीएम से अधिक होना चाहिए। इस समय यह केवल 0.4 पीपीएम ही है। इसी तरह आयरन, नाइट्रोजन, फास्फोरस का स्तर भी काफी कम हो गया है। इसमें जीवाश्म कार्बन के अति न्यून स्तर के अलावा फास्फेट, सल्फर एवं जिंक की मात्रा भी कम पाई गई है। इसके लिए लगातार परंपरागत खेती को कारण विशेषज्ञ मान रहे हैं।
केंद्र सरकार ने मिट्टी की सेहत के प्रति किसानों को जागरूक बनाने के मकसद से मृदा हेल्थ कार्ड स्कीम चलाई है। जिसमें अलग-अलग क्षेत्र की मिट्टी की जांच की जाती है। जिससे मिट्टी में पाए जाने वाले 16 पोषक तत्वों की मात्रा और उसे बढ़ाने की तरकीब भी बताई जाती है। मानव शरीर की तरह मिट्टी में भी पोषक तत्वों की काफी जरूरत होती है। उनकी कमी से फसलों में तमाम प्रकार की बीमारी होने के साथ ही पैदावार भी प्रभावित होती है। दिसंबर 2019 तक मिट्टी की जांच के बाद एक लाख 87 हजार के सापेक्ष डेढ़ लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया। कोविड के कारण स्कीम को अस्थाई तौर पर रोक लगा दिया। जिससे 2020 से लेकर 2022 तक मृदा स्वास्थ्य की जांच नहीं हो सकी। अब एक बार फिर जांच शुरू हो गई है। इनसेट
किसान फसल चक्र अपनाएं तो बने बात ज्ञानपुर। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि खेती में फसल चक्र का अपनाया जाना जरूरी है। लगातार परंपरागत ढंग से गेहूं-धान की खेती करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जाती है। यदि खेतों में मूंग, उड़द की फसल पलट दी जाए तो जीवाश्म कार्बन की उपलब्धता हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। फसल चक्र के अभाव में नाइट्रोजन की उपलब्धता पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। किसान सनई, ढैंचा की खेती भी नहीं कर रहे हैं।