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माटीकला योजना से बदलेगी माली हालत

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ज्ञानपुर। प्लॉस्टिक से बने सामान के बढ़ते चलन से बेेजार हो चुकी मिट्टी कला के अब अच्छे दिन आने वाले हैं। मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना में प्रजापति (कुम्हार) जाति को 10 लाख तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थियों से आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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दो से ढाई दशक पूर्व बाजारों में मिट्टी से बने बर्तन से लेकर अन्य आइटम मिलते थे, जो पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर होते थे। भौतिकता के दौर में प्लॉस्टिक से बने सामानों की मांग बढ़ने, चाइनीज आईटम की भरमार होने से मिट्टी के बने सामान की मांग घट गई तो कुम्हार जाति के लोग कारोबार से हाथ खींचने लगे। इससे बेरोजगारी बढ़ने के साथ ही उनका दूसरे प्रांतों में पलायन शुरू हो गया। आलम यह हो गया कि कुम्हारों का व्यवसाय अतीत की गाथा बन गया। पुश्तैनी धंधा छिनने से कई परिवार बेरोजगार हो गए। पॉलिथीन प्रतिबंध के बाद सरकार ने माटीकला रोजगार योजना को लागू किया। इसमें कुम्हार जाति के लोगों को रोजगार सृजन के लिए 10 लाख तक का ऋण बिना ब्याज देने का प्रावधान है। इससे अब उन्हें घर बैठे रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। जिले में करीब 15000 से अधिक कुम्हार हैं। इनमें अधिसंख्य ऐसे हैं, जिनका परिवार सिर्फ चाक के धंधे पर की पूरी तरह निर्भर करता है। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जेपीएन सिंह ने बताया कि कुम्हार जाति के लिए यह योजना संजीवनी का काम करेगी। कर्ज लेकर वह अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं। कुल्हड़ समेत अन्य मिट्टी के बर्तन आदि बनाकर उसे बेच सकेंगे। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों का चयन करने के के लिए 25 जनवरी तक आवेदन मांगा गया है। वहीं दूसरी ओर सेमरा निवासी नंदलाल प्रजापति, अभियां के सुमित प्रजापति और गणेशरायपुर के रेस कुमार प्रजापति ने सरकार की योजना को सराहा। हालांकि मिट्टी खनन के लिए पट्टा देने की भी मांग की।
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