सेमराध कल्पवास मेला में कवि सम्मेलन में काव्य पढ़ते कवि। संवाद
कल्पवास मेले में सजी कवियों की महफिल
संवाद न्यूज एजेंसी
जंगीगंज। सेमराध घाट पर कल्पवास मेले में शनिवार को कवि सम्मेलन हुआ। प्रयागराज के कवि ध्रुवराज यदुवंशी की रचना, कितने रावण फूंक दिए लेकिन अब तक बुराई जिंदा है, तुम जश्न मनाओ जितने भी हम तो शर्मिंदा हैं। ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गंगा की रेत पर भदोही समेत अन्य जनपदों से आये कवियों की महफिल सजी। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उपस्थित लोगो को कविता से सराबोर कर दिया। कल्पवासियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कवि का उत्साह वर्धन किया। संचालन करते हुए सुरेंद्र पांडेय उर्फ मंजूल ने कहा ये हवा दे रहे हैं आग लगाने वाले, उठ रही लपटों को मिलकर बुझाया जाए... कविता पाठ पर पूरा पंडाल झूम उठा। इसी तरह विद्यापति शुक्ला उर्फ कोकिल ने बाहर सजाते सजाते घर खंडहर हो गया, कवि पारस नाथ मिश्र ने सुनाया दुःख दरीद्र देश से दूर भगै, सेमराध के नाथ कृपा करिये, मिर्जापुर के विवेकानंद चौबे ने सुनाया तुम्हारे बिना लगते खुज फीके सारे, तुम हो तो सुंदर है सभी नजारे। मेले के महंत करुणा शंकर दास महाराज ने कहा कोई कितना भी संसारिक सुख प्राप्त कर ले भगवान की भक्ति और कृपा के बिना कुछ संभव नहीं है। भारत की सनातन सभ्यता में स्वयं का अध्ययन करना ही सच्ची भक्ति है। जो स्वयं को जानता है वही संत है। अब मनुष्यता नीचे जा रही है। इसलिए अपने का अध्ययन करना ही सबसे बेहतर है। संदीप कुमार बालाजी, बेहोश जौनपुरी ने भी कविता पाठ किया।