पूरे जीवन राष्ट्र के भविष्य को संवारने में योगदान करते रहे और जीवन के अंतिम क्षण में भी देश के कर्णधारों को उनके कर्तव्यबोध से ही परिचित करा रहे थे। उनका जाना हमारी अपूरणीय क्षति जरूर है, लेकिन जो वह हमें देकर गए हैं, वह आने वाली कई पीढ़ियों तक हमें समृद्ध करता रहेगा। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर व्यथित कालीन नगरी के लोगों ने मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं।
एडवोकेट तेज बहादुर यादव ने कहा कि डा. कलाम सचमुच भारत के अनमोल रत्न थे। उनके योगदान को देश कभी नहीं भूल पाएगा। ज्ञानपुर के डा. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रपति रहते हुए भी कलाम साहब लोगों से जुड़े रहे। पहली बार शायद ऐसा हुआ था कि भारत देश को डा. कलाम के रूप में इतना सक्रिय राष्ट्रपति मिला था। डा. कलाम के व्यक्तित्व पर चर्चा करते प्रमोद दुबे ने कहा कि कलाम साहब ने देश के राष्ट्रपति की छवि को नया आयाम दिया। देश के उत्थान से जुड़े हर कार्य में जरूरत के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति होते हुए भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। करुणेश मालवीय और बबलू श्रीवास्तव ने भी कलाम के व्यक्तित्व को उत्कृष्ट बताते हुए उनके निधन को बड़ी क्षति बताई। कहा कि उनके बारे में अध्ययन करने से पता चलता है कि वह धुन के पक्के थे। मुन्ना खां ने कहा कि बचपन में विषम आर्थिक स्थितियों के बावजूद उन्होंने बेहतर तालीम हासिल की और मिसाइलमैन के रूप में पूरी दुनिया में देश के नाम को गर्व के फलक पर टांग दिया। लखनों के अशोक कुमार दुबे ने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि ऐसी विभूतियों ने भारत की धरती पर जन्म लिया जिनकी बदौलत हम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी फख्र से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।