जब भी लोग बीमार होते हैं तो आस-पास के सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होते हैं। सड़क हादसों में घायल होने वालों को भी अस्पताल ले जाया जाता है, ताकि उनकी जिंदगी बच सके। घायलों व बीमार लोगों को अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस का सहारा लिया जाता है। इसके लिए जिले में विभिन्न अस्पतालों के कुल 45 एंबुलेंस संचालित होते हैं। इनमें से कई एंबुलेंस ऐसे हैं, जो बीमार यानी अनफिट हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों में भी 15 एंबुलेंस ऐसे हैं, जो फिटनेस में फेल हो चुके हैं। अब इन्हें चिह्नित कर संबंधित वाहन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
अभी हाल के दिनों में गाजियाबाद में स्कूल बस में बाहर सिर किए बच्चे की मौत के बाद परिवहन विभाग की तंद्रा टूटी है। उसके बाद स्कूली वाहनों की धड़ाधड़ जांच होने लगी है। जब कहीं दुर्घटना हो जाती है तो संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों की सक्रियता बढ़ जाती है और जांच करके मानक के विपरीत संचालित होने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अभी जिन एंबुलेंस का फिटनेस फेल है, उनसे कोई हादसा हाल के दिनों में नहीं हुई है, शायद इसीलिए संभागीय परिवहन विभाग भी ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान नहीं चला रहा है। परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई तो ऐसे भी वाहन हैं जिनका पंजीकरण नहीं है, इसके बावजूद एंबुलेंस के रूप में सड़कों पर चल रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल 45 एंबुलेंस का विभाग में पंजीकरण है। इसमें से 15 फिटनेस में फेल हो चुके हैं। किसी का दस दिन तो किसी का महीने भर से फिटनेस नहीं है।
उधर, परिवहन विभाग के आरआई प्रमेंद्र ने बताया कि विभाग में विभिन्न अस्पतालों के कुल 45 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इसमें से 15 के फिटनेस फेल हो चुके हैं और 30 के सही हैं। जिनके फिटनेस फेल हैं, संबंधित वाहन स्वामियों नोटिस भेजकर फिटनेस कराने के लिए कहा जा रहा है। फिटनेस नहीं कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एआरटीओ अरुण कुमार का कहना है कि जिन एंबुलेंसों का फिटनेस फेल है, संबंधित वाहन स्वामी शीघ्र फिटनेस नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक-दो दिन में ही अभियान चलाकर मानक के विपरीत चल रहे एंबुलेंस पर कार्रवाई की जाएगी।