भदोही के पूरेमुड़िया गांव में मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ वेदी पूजन और कलश यात्रा के साथ हुआ।
सुबह नौ बजे गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर पूरे गांव का भ्रमण किया और कथा पंडाल तक पहुंची।
डीजे और ढोल-ताशे की धुन से पूरा गांव भक्तिमय हो गया। कथा वाचक काशी धाम से पधारे आचार्य डॉ. प्रभाकर पांडेय महाराज ने कथा के महात्म्य को समझाया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे।
दिव्य कल्पतरू है श्रीमद्भागवत महापुराण : अनुराग : कौलापुर। डीघ के कौलापुर गांव में डॉ. लक्ष्मीधर चतुर्वेदी के यहां चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा वाचक अनुराग जी महाराज ने परीक्षित जन्म, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र आदि की कथा सुनाई। भीष्म स्तुति, कपिल चरित्र और ध्रुव चरित्र आदि प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि शुकदेव जी के आगमन से भागवत कथा का शुभारंभ होता है, जिससे ज्ञान और भक्ति की धारा प्रवाहित होती है। भीष्म स्तुति प्रसंग में महाराज ने पितामह भीष्म के जीवन को धर्म, नीति और भक्ति का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि मृत्यु शैया पर भी श्रीकृष्ण का ध्यान कर भीष्म ने यह संदेश दिया कि सच्चा भक्त हर परिस्थिति में ईश्वर का स्मरण रखता है।
कपिल चरित्र के माध्यम से महाराज ने सांख्य योग के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए आत्मज्ञान और भक्ति को मोक्ष का मार्ग बताया। कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।