ज्ञानपुर। भदोही के मशहूर कालीन उद्योग को नई उड़ान देने के लिए लगभग डेढ़ दशक पूर्व शुरू की गई स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) की परिकल्पना को लापरवाही का दीमक चट कर गया। करोड़ों रुपये खर्च कर भूमि अधिग्रहण करने के बावजूद मुआवजे के फेर में फंसे महत्वपूर्ण मसौदे के निर्माण की समय सीमा खत्म हो गई। इस बीच सरकार की ओर से एसईजेड बनाने की अवधारणा पर भी विराम लगा दिया गया। लिहाजा भदोही सेज का प्रस्ताव मूर्त रूप लेने से पूर्व ही लापरवाही की कब्र में दफन हो गया। अब अधिग्रहीत जमीन पर भी कब्जा हो रहा है। उससे निपटने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
वर्ष 2006 में भदोही-वाराणसी राजमार्ग पर विशेष आर्थिक परिक्षेत्र के निर्माण की परिकल्पना को धरातल पर उतारा गया। इसके लिए भदोही और बनारस जिले की सीमा से लगे इलाकों को मिलाकर सेज निर्माण का काम शुरू किया गया। सेज निर्माण की जिम्मेदारी देख रही यूपीएसआईडीसी ने भदोही-वाराणसी जनपद की सीमा पर कंधिया फाटक के समीप 220 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था। जिला प्रशासन के सहयोग से भदोही के कंधिया, धनापुर, जोलहापुर, टिकैतपुर, हड़ईबारी, गोपालपुर, चांदीगहना, लच्छापुर और वाराणसी के शिवदासपुर, घोड़ा इमाम, दौलतिया आदि गांवों के 1036 किसानों को 16 करोड़ 66 लाख रुपये मुआवजा देकर 111 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई। शेष जमीन के अधिग्रहण के समय मुआवजा कम मिलने की बात कहते हुए किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। इससे पेच फंस गया। इस दौरान कई बार किसानों को मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस बीच कुछ किसान कोर्ट चले गए और 738 किसान अपनी जमीन नहीं देने पर अड़ गए। इस तरह जिले में सेज निर्माण का कार्य अधर में लटक गया। धीरे-धीरे लगभग डेढ़ दशक गुजरने के बाद अब अधिग्रहीत जमीन के लगभग 60 फीसदी हिस्से पर फिर कब्जा हो गया है। यहां तक कि मुआवजा ले चुके किसान भी उन जमीनों पर खेतीबारी करने लगे हैं।
इस संबंध में जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सेज निर्माण का काम यूपीएसआईडीसी देख रहा था। अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा हो रहा है तो यह गंभीर मसला है। अगर यूपीएसआईडीसी चाहे तो जिला प्रशासन अधिग्रहीत जमीन पर कब्जे के मामले में विधिक कार्रवाई कर सकता है।
भदोही सेज के लिए अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया था। इससे प्रकरण लटक गया। फिर कुछ किसान कोर्ट चले गए। इसको लेकर पेच फंसता गया। इस बीच शासन से सेज का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो गया। नोएडा और मुरादाबाद के बाद प्रदेश में कहीं पर विशेष आर्थिक परिक्षेत्र को मंजूरी नहीं मिली। इससे अब भदोही सेज का निर्माण संभव नहीं है।
आरके चौहान, एक्सईएन यूपीएसआईडीसी, प्रयागराज
अधिग्रहीत जमीन पर लगेंगे उद्योग
ज्ञानपुर। भारी-भरकम धनराशि खर्च कर सेज के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के बड़े हिस्से पर फिर से कब्जा हो गया है, मगर सेज निर्माण के लिए जिम्मेदार संस्था राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) को शायद खबर तक नहीं है। अब सेज तो बनने से रहा, मगर यूपीएसआईडीसी ने अधिग्रहीत जमीन को औद्योगिक विकास के लिए उपयोग में लाने का मन बना लिया है। यूपीएसआईडीसी के एक्सईएन आरके चौहान के मुताबिक उस जमीन को औद्योगिक विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वहां उद्योग विकसित किए जा सकते हैं। जमीन पर अतिक्रमण के सवाल पर उन्होंने कहा कि जल्द ही जिला प्रशासन से संपर्क कर जमीन को कब्जामुक्त कराया जाएगा।