ज्ञानपुर। एफटीसी प्रथम सुबोध सिंह की अदालत ने आत्महत्या के उकसाने के मामले में मृतका के पति आशीष गौड़ को सात साल सश्रम कारावास और 30 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। चार साल पूर्व की घटना में कोर्ट ने निर्णय सुनाया।
अभियोजन के मुताबिक लालजी गौड़ निवासी मड़ियाहू जौनपुर ने दो जनवरी 2020 को सुरियावां थाने में तहरीर दिया कि उसने अपनी बेटी निशा देवी की शादी दो जून 2017 को आशीष गौड़ निवासी वंशीपुर के साथ किया था। शादी में उसने अपनी क्षमता के हिसाब से सबकुछ दिया था, लेकिन उसकी बेटी को ससुराल वाले बाद में दहेज में मोटरसाइकिल और डेढ़ लाख नकद की मांग करने लगे। जिसको देने में वह सक्षम नहीं था।
23 अक्तूबर 2020 को उसकी बेटी के पति और ससुराल वालों ने हत्या कर साक्ष्य समाप्त करने का प्रयास किया गया। अंतिम संस्कार के लिए बिना सूचना के बेटी के शव को सीतामढ़ी घाट लेकर चले गए। वादी मुकदमा ने पुलिस अधीक्षक को संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया।
पुलिस की सक्रियता से सीतामढ़ी घाट पर दाह संस्कार रोककर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने दहेज हत्या एवं आत्महत्या के दुष्प्रेरण का मुकदमा दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में भेजा। अभियोजन की ओर से आठ गवाह परीक्षित हुए। दोनों पक्षों के बहस-पैरवी के बाद न्यायाधीश ने पति आशीष गौड़ को आत्महत्या के दुष्प्रेरण में दोषी मानते हुए सात साल सश्रम कारावास और 30 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता प्रवेश तिवारी ने किया।