ज्ञानपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लेकर लोगों की दिलचस्पी कम होती जा रही है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब मात्र ढाई महीने शेष हैं, लेकिन 831 के सापेक्ष अब तक 296 गरीब बेटियों के हाथ पीले हो सके हैं। यह संख्या लक्ष्य की 35 फीसदी भी नहीं है। ऐसे में मार्च तक शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा करना एक चुनौती है।
गरीब बेटियों की शादी के लिए सरकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का आयोजन कराती है। इसमें प्रति जोड़ों पर 51 हजार खर्च होता है। हर साल इसके लिए शादी का एक लक्ष्य तय किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जिले में 831 शादियों का लक्ष्य शासन ने तय किया, लेकिन धीरे-धीरे आठ से नौ महीने खत्म हो गए, लेकिन समाज कल्याण विभाग लक्ष्य से कोसों दूर है।
इसके पीछे बलिया की घटना को माना जा रहा है। बलिया में व्यापक स्तर पर मिली धांधली के बाद शासन ने सख्ती शुरू कर दी। सितंबर में सिर्फ 46 जोड़ों का विवाह हुआ। 19 अक्तूबर को 43 और 25 नवंबर को भी सिर्फ 100 शादियां हो सकी।
दिसंबर में भी 40 के करीब जोड़े एक दूजे के हुए। अब खरमास खत्म होने पर 23 जनवरी को एक बार फिर विवाह का आयोजन किया गया है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 296 शादियां हो सकी है। समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव ने बताया कि 23 जनवरी की शादी में संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मार्च तक दो से तीन बार कार्यक्रम कराए जाएंगे।