जिले की बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत सात स्थानों पर नए विद्युत उपकेंद्र बनाने की तैयारी तेज कर दी गई है। इससे तीन लाख से ज्यादा आबादी लाभान्वित होगी। इसके अलावा लो वोल्टेज की समस्या तो दूर होगी ही, अघोषित कटौती से भी लोगों को निजात मिलेगी। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। वहां से हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कराए जाने की उम्मीद है।
लगभग एक दशक पूर्व से जिले में स्थित 24 उपकेंद्रों पर प्रतिदिन बढ़ रहे अतिरिक्त लोड के कारण उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। पांच वर्ष पूर्व शुरू हुई सौभाग्य योजना के तहत हर घर बिजली पहुंचाने, राजमार्ग समेत ग्राम पंचायतों की तरफ से मिले प्रस्तावों पर स्ट्रीट, हाई मास्ट लाइट आदि लगाने के बाद उनका भार भी इन्हीं उपकेंद्रों पर है। ऐसे में कई बार ग्रामीण क्षेत्र के लोग शिकायत करते हैं कि लो वोल्टेज की समस्या है। कई बार जर्जर तार और उपकरण के पुराने होने के कारण भी समस्या पैदा होती है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए विद्युत विभाग ने जिले में सात नए उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। विद्युत निगम के अधिकारियों के अनुसार ज्ञानपुर, औराई और भदोही तीनों तहसीलों में उपकेंद्र बनाए जाएंगे। अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि रिवैंप योजना के तहत सात उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। शासन को भेजे गये प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने पर 2022 से निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। इससे करीब 50 हजार उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि सौभाग्य योजना के तहत प्रस्तावित 70 प्रतिशत कार्य अब तक पूरे हो चुके हैं। जब कार्यदायी संस्था योजना का क्रियान्वयन कर रिपोर्ट करेगी, तभी राहत मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में 1000 की आबादी वाले गांवों का सर्वेक्षण टीम ने चयन कर शासन को प्रस्ताव भेजा था। इनमें से लगभग 199 गांवों में जर्जर तारों के स्थान पर कंडक्टर वायर लगाने का कार्य शुरू भी हो चुका है। तार लगाते समय खराब खंभों समेत अन्य उपकरण भी बदलवाए जा रहे हैं। इस कार्य पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।