संत निरंकारी बाबा हरदेव सिंह की कनाडा में सड़क हादसे में मौत की खबर मिलते ही यहां उनके अनुयायियों में मातम छा गया। कंसापुर स्थित संत निरंकारी मंडल शाखा भवन में सन्नाटा छा गया और मृतक आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना में लीन हो गए। बाबा हरदेव इस वर्ष अगस्त में ज्ञानपुर आकर शिष्यों को दर्शन देने वाले थे, लेकिन उनके दर्शन से वंचित रह जाने की टीस अब अनुयायियों को सालने लगी है।
आश्रम की देखरेख करने वाले दीनदयाल मुखी ने बताया कि उन्होंने इंसान की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया था। उन्होंने कहा कि रक्तदान महादान है। इसके जरिए पृथ्वी पर जीवात्मा के बीच नैसर्गिक जुड़ाव होता है। इसे जरूर करना चाहिए। उनकी शिक्षाएं जीवन को एक नया आयाम दे रहीं थीं, लेकिन अचानक इस ताजे घटनाक्रम ने झकझोर कर रख दिया है। हजारों अनुयायी अमृत ज्ञान से महरूम रह गए। कई अनुयायियों को तो सहसा यकीन ही नहीं हुआ कि अचानक यह कैसे हो गया, लेकिन पता चला तो शोक संतप्त हो गए। रामजी ठेकेदार, विनोद चौरसिया, लाल बहादुर मौर्य, राम अवध, मुन्नीलाल यादव, अनिरुद्ध कुमार, ऊदल आदि लोग बाबा हरदेव के निधन की खबर सुनकर भावुक हो गए।
दीनदयाल मुखी के मुताबिकज्ञानपुर में संत निरंकारी मंडल शाखा की शुरुआत 1994 में हुई। उसके बाद से बाबा जी तो यहां नहीं आ पाए, लेकिन उनके आशीर्वाद के प्रभाव से सबकुछ सहजता से चलता रहा।