डायरिया और लू से निपटने के इंतजाम नाकाफी
डायरिया और लू के असर से निपटने के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में सिवा परंपरागत गोलियां देने के और कोई इंतजाम नहीं हैं। कहर बरपाती गर्मी के बीच अस्पतालों में जहां मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, वहीं दवा-इलाज की समुचित व्यवस्था के अभाव में मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शुक्रवार को अकेले जिला अस्पताल में डायरिया और उल्टी-दस्त के 42 मरीज भर्ती कराए गए। जबकि ओपीडी में 1053 पर्चियां कटीं।
बढ़ती गर्मी के साथ ही डायरिया और उल्टी-दस्त की बीमारी ने मुश्किलें बढ़ानी शुरू कर दी है। सरकारी और निजी अस्पताल इन दिनों इन्हीं बीमारियों के मरीजों से भरे पड़े हैं। यही वजह है कि दवा की दूकानों पर भी मरीजों की कतार लग रही है। लेकिन, हैरत की बात यह है कि गरीबों के लिए सुलभ सरकारी अस्पतालों में ऐसे मरीजों से निपटने के लिए कारगर इंतजाम नहीं किए गए हैं। जैसे-तैसे कुछ गोलियों और पानी की बोतल के सहारे डायरिया को नियंत्रित किया जा रहा है। कई बीमारियों में मरीजों को तमाम जरूरी दवाएं बाहर से लेने के लिए बोल दिया जाता है। उधर चिकित्सकों ने इस बीमारी के उपचार की अपेक्षा बचाव पर ज्यादा जोर दिया। उनका कहना है कि धूप और लू से बचकर रहें तो बेहतर रहेगा। डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि गर्मी में खानपान और जीवनशैली संयमित रहनी चाहिए।
इनसेट
बचाव के लिए सावधानियां
- बासी भोजन न करें।
- स्वच्छ पानी पीएं।
- पानी खूब पीएं और पानी पीकर ही घर से बाहर निकलें।
- बच्चों का खास ध्यान देना चाहिए।
- गर्मी में तला-भुना और मसालेदार भोजन से तौबा करें।
घरेलू उपचार
- उल्टी-दस्त हो तो तुरंत नमक, पानी, चीनी और नीबू का घोल बनाकर पीना शुरू कर देना चाहिए।
- भोजन में पतली खिचड़ी लेना चाहिए।
- सुधार न हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
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