विभागीय सख्ती के चलते मूल्यांकन केंद्र के मुख्य गेट से अंदर तक पुलिस फोर्स तैनात रही। पुलिस की मौजूदगी से आंदोलनकारी शिक्षक खुलकर अन्य शिक्षकों का विरोध नहीं कर सके।
मूल्यांकन केंद्र पर डीआईओएस डा. ओम प्रकाश गुप्त भी चक्रमण करते रहे।
विभिन्न मांगो को लेकर 30 मार्च से शिक्षक संगठन मूल्यांकन का बहिष्कार कर रहे हैं।
शुक्रवार को विभागीय स्तर से मूल्यांकन कार्य शुरू कराने का प्रयास किया लेकिन विरोध के चलते बंद करना पड़ा। आंदोलनकारी शिक्षकों के विरोध को देखते हुए डीआईओएस ने शनिवार को पुलिस की मदद ली। शनिवार को पूर्वाह्न 10 बजे से वीएनजीआईसी में काफी मात्रा में पुलिस की तैनाती कर दी गई।
राजकीय और कुछ वित्तपोषित शिक्षकों के सहयोग से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के कापियों का मूल्यांकन शुरू कराया गया। पुलिस की मौजूदगी होने से आंदोलनकारी शिक्षक खुलकर विरोध नहीं कर सके, हालांकि वह भी वीएनजीआईसी परिसर में धरनास्थल पर बैठकर सरकार और विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
आंदोलनकारी कुछ शिक्षक मूल्यांकन करने के लिए जा रहे शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा लेकिन अफसरों की सतर्कता से उनकी एक न चल सकी। धरने में हंसराज तिवारी, सुशील मिश्रा, जगदीश नारायण दूबे, वीरेंद्र प्रताप सिंह, बसंतलाल यादव, ह्दय नारायण पांडेय, सुदर्शन राम, समर बहादुर शर्मा, रामशेखर, कृष्ण किंकर, लल्लन पांडेय, रामसमुज पांडेय, बाल कुमार आदि रहे।
लेकिन मूल्यांकन न शुरू होने से ऐसा नहीं हो सका।