ज्ञानपुर। सुरियावां ब्लॉक के जमुनीपुर अठगवां में सरकारी धन की धोखाधड़ी में जेल गए सचिव पर विभागीय कार्रवाई हो गई। सोमवार शाम को डीडीओ जयकेश त्रिपाठी ने ग्राम पंचायत अधिकारी संतोष सिंह को निलंबित कर दिया। इसके पहले भी सचिव विवादों में रहा है। जिन-जिन ग्राम पंचायतों में तैनाती हुई, वहां उन पर हेरफेर की शिकायतें सामने आई। कुछ ग्राम पंचायतों में जांच हुई तो कुछ ठंडे बस्ते में चली गईं।
ग्राम पंचायतों के बेहतर विकास के लिए सरकार राज्य वित्त, चौदहवें वित्त और स्वच्छता मिशन के मद में हर साल करोड़ों खर्च करती है। जिले की 561 ग्राम पंचायतों में से कुछ को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर प्रधान और सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। सत्ता-शासन से संरक्षण प्राप्त करने वाले कुछ सचिव तो नियमों को ताख पर रखकर सरकारी बजट में बंदरबाट करने से भी गुरेज नहीं किए। कई गांव में तैनाती पर सवालों में घिरने वाले सचिव संतोष सिंह पर पुलिस और प्रशासन का चाबुक जमुनीपुर अठगवां में आखिरकार पड़ गया। जिले की बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल जमुनीपुर अठगवां में प्रधान पुत्र संग मिलकर प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर से खेल करने में वह फंस गए।
ग्राम प्रधान खुद मैदान में उतरीं तो सचिव को जेल की हवा खानी पड़ गई। जमुनीपुर अठगवां से सचिव को इस कदर प्रेम था कि दूसरे क्षेत्र में भेजने के बाद भी वह ऐन केन प्रकारेण वापसी कर लेता। तीन दिन पूर्व जालसाजी के मामले में गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया। उसके बाद विभागीय कार्रवाई भी की गई। सुरियावां ब्लॉक के एक सचिव भी काफी चर्चा में हैं। सत्ता के संरक्षण से वह भी नियमों को ताख पर रखकर सरकारी योजनाओं का पलीता लगा रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि सचिव के खिलाफ पूर्व की जांच लंबित है। जल्द ही सभी जांच को पूर्ण कराया जाएगा।