मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने चर्चित ओमैसम प्रकरण में ओमैसम मांस की दावेदारी में दोनों व्यापारियों के तर्कों को सुनने के बाद 33 लाख की जमानत पर इकबाल कुरैशी के पक्ष में रिलीज करने का आदेश दिया।
26 जनवरी 2016 को लालानगर टोल प्लाजा के पास गोपीगंज पुलिस ने एक ट्रक मांस पकड़ा था। तत्कालीन एसओ रमेश चौबे ने उसे गौमांस बताते हुए सीज कर दिया था। बाद में धोखे से उसे भवानीपुर गांव के समीप डिस्पोजल कर दिया गया था। मामले में नया मोड़ तब आया, जब महाराष्ट्र के एक सपा विधायक ने इस प्रकरण में हाथ डाला। शासन के दबाव के बाद जांच शुरू हुई तो कई पुलिसकर्मी फंस गए। एसओ रमेश चौबे, क्राइम ब्रांच के सिपाही इमरान खान, पूर्व एसओ ऊंज रंग बहादुर पांडेय समेत पांच सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया। ओमैसम पर हापुड़ के व्यापारी इकबाल कुरैशी और कानपुर के व्यापारी इमरान ने अपना माल होने का दावा पेश किया। दोनों के दावे से पुलिस और भी उलझ गई। दोनों व्यापारियों ने अंत में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। बुधवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. सत्यवान सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलील और तर्कों को सुनने के बाद 33 लाख के जमानत पर इकबाल कुरैशी को ओमैसम देने का आदेश दिया। इकबाल की ओर से मामले में बहस पैरवी अधिवक्ता तेज बहादुर यादव ने की।